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सर्व शिक्षा अभियान का कड़वा सच, 133 बच्चों पर एक अध्यापक

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सर्व शिक्षा अभियान का कड़वा सच, 133 बच्चों पर एक अध्यापक
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गढ़मुक्तेश्वर। प्रदेश शासन अपनी शिक्षा को कान्वेंट की तर्ज पर चाक चौबंद करने की कवायद में जुटा हुआ है। लेकिन दूसरी तरफ अध्यापकों की कमी, जर्जर स्कूलों की बदहाली और जरूरी मूलभूत सुविधाओं का टोटा दूर नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तादाद बढ़ने की बजाए हर साल घटती जा रही है।
गढ़ में बारादरी मैदान के पास करीब पांच दशक पुराना राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल संचालित हो रहा है। जिसमें कक्षा एक से लेकर आठ तक 133 बच्चे - बच्चियां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ा लिखाकर काबिल बनाने का जिम्मा एकमात्र अध्यापक बाबूराम संभाल रहे हैं। स्कूल में शनिवार को महज 85 बच्चे ही मौजूद मिले, जबकि 48 बच्चे स्कूल से नदारद थे। पूछताछ करने पर स्कूल के इकलौते शिक्षक ने बताया कि उनकी मूल तैनाती गढ़ के जूनियर हाईस्कूल में है, लेकिन कन्या जूनियर हाईस्कूल में तैनात सभी अध्यापकों के रिटायर होने और विभागीय स्तर से कोई नई तैनाती न होने पर जिला बेसिक शिक्षा विभाग स्तर से उन्हें संबद्ध किया हुआ है।
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छात्र-अध्यापक की संख्या का क्या है मानक
सरकारी शिक्षा के तयशुदा मानकों की धज्जी बिखरने के बाद भी विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं। सरकारी शिक्षा से जुड़े मानकों के तहत प्राइमरी स्कूल में 30 और जूनियर हाईस्कूल में 35 बच्चों पर एक अध्यापक की तैनाती होनी जरूरी है, लेकिन गढ़ के कन्या जूनियर हाईस्कूल में सरकारी शिक्षा के मानकों की धज्जी उड़ाकर 133 बच्चों को पढ़ाने लिखाने का जिम्मा इकलौते अध्यापक के कंधों पर सौंपा गया है। इकलौते अध्यापक द्वारा एक कक्षा में पढ़ाने के दौरान दूसरी कक्षाओं के बच्चे खेलकूद और गपशप करने के साथ ही खाली बैठने को मजबूर रहते हैं, जिसके चलते हर दिन औसतन 40 से लेकर 50 बच्चे स्कूल से नदारद रहते हैं।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि कन्या जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की तैनाती शासन स्तर से ही होती है, लेकिन धीरे धीरे मूलरूप से तैनात सभी शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने पर स्कूल को बंद होने से बचाने को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जूनियर हाईस्कूल के एक शिक्षक को संबद्ध किया गया है। उन्होंने बताया कि कन्या जूनियर हाईस्कूल में अगर 133 बच्चों का दाखिला है तो फिर शासन स्तर से कोई नई तैनाती होने तक वैकल्पिक तौर पर शिक्षकों की तादाद को बढ़ाया जाएगा।
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