लखनऊ की एंटी करप्शन टीम जांच के लिए पहुंची गढ़ नगर पालिका
गढ़मुक्तेश्वर। ट्रैपिंग ऑपरेशन को दौरान रिश्वत देने को लाई गई चार लाख की रकम लेकर फरार हुए ठेकेदार का कोई सुराग न लगने पर बृहस्पतिवार को जांच के लिए लखनऊ से एंटी करप्शन की टीम गढ़ नगर पालिका पहुंची। डीएसपी के नेतृत्व में टीम ने पालिका के सभी कर्मचारियों से पूछताछ की । टीम ने दफ्तर और आसपास की वीडियोग्राफी भी कराई। वहीं डीएसपी ने फरार ठेकेदार की जल्द गिरफ्तारी का दावा भी किया।
गढ़ पालिका कार्यालय में 28 जून की दोपहर बाद मेरठ की एंटी करप्शन टीम द्वारा किए गए ट्रैपिंग ऑपरेशन के दौरान रिश्वत के तौर पर ईओ को दी जाने वाली चार लाख की रकम ठेकेदार भूपेंद्र सिंह लेकर फरार हो गया था। ठेकेदार की गिरफ्तारी न होने के कारण एंटी करप्शन टीम की खूब किरकिरी हो रही है। पुलिस व टीम की लगातार दबिश के बाद भी ठेकेदार का सुराग न मिलने के कारण आला अफसर खासे नाराज बताए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को इस मामले में जांच के लिए लखनऊ से डीएसपी संदीप वर्मा के नेतृत्व में मेरठ की एंटी करप्शन टीम गढ़ पालिका कार्यालय पहुंची। टीम के पहुंचते ही वहां हड़कंप मच गया। मेरठ से आए इंचार्ज केपी सिंह, निरीक्षक यतेंद्र शर्मा, अरविंद कुमार समेत 9 सदस्यीय टीम ने करीब दो घंटों तक पालिका कार्यालय में बने ईओ के आवास की छत समेत पीछे बने मकानों की भी बारीकी से जांच की। इस दौरान टीम ने पालिका दफ्तर से ईओ के आवास को जाने वाले रास्ते, उसकी छत और पीछे बने उन मकानों की वीडियोग्राफी भी कराई जहां से जहां से ठेकेदार चार लाख की रकम लेकर फरार हुआ था।
ईओ के नजदीकियों के बारे में की पूछताछ
एंटी करप्शन टीम ने पालिका दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों से अलग अलग काफी देर तक पूछताछ की, जिसमें मुख्य रूप से ईओ के नजदीक रहने वाले कर्मचारी और ठेकेदार, चार लाख की रकम लेकर फरार हुए भूपेंद्र के ईओ के आवास पर आने जाने समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली गई।
ठेकेदार की तलाश में डाली जा रहीं ताबतोड़ दबिश
एंटी करप्शन टीम इंचार्ज केपी सिंह ने बताया कि चार लाख की रकम लेकर फरार हुए भूपेंद्र की तलाश में उसके बहजोई स्थित आवास समेत संभल, मुरादाबाद, बदायूं, अमरोहा, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, दिल्ली, नोएडा समेत विभिन्न शहर कस्बों में रहने वाले उसके रिश्तेदार और परिचितों के घरों पर लगातार दबिश दी जा रही हैं, जिसके चलते आरोपी बहुत जल्द रकम समेत पकड़ में आ जाएगा।
ईओ के लिए बुना था जाल, रकम लेकर भागा ठेकेदार
माई सिटी रिपोर्ट
गढ़मुक्तेश्वर। पालिका क्षेत्र में किए गए करीब 50 लाख के कामों का पेमेंट कराने और ब्लैक लिस्ट न करने की आड़ में दस लाख की रिश्वत मांगने का आरोप लगाकर ठेकेदार गौरव मिश्रा ने भ्रष्टाचार निवारण विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पालिका ईओ को रंगे हाथ पकड़ने के मकसद से मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने 28 जून की दोपहर बाद गढ़ पालिका कार्यालय में ट्रैपिंग ऑपरेशन किया था। लेकिन सारी गोपनीयता और सतर्कता समेत घेराबंदी को ठेकेदार भूपेंद्र सिंह निवासी बहजोई संभल ने धता साबित कर दिया था, क्योंकि पहले से ही ईओ के आवास पर मौजूद ठेकेदार भूपेंद्र रिश्वत के तौर पर दी गई चार लाख की रकम समेत छत कूदकर फरार हो गया था।
इस मामले में एंटी करप्शन टीम पालिका के लिपिक अब्दुल को गिरफ्तार कर ले गई थी। टीम इंचार्ज केपी सिंह ने लिपिक समेत पालिका ईओ अमिता वरुण और रकम लेकर फरार हुए ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एंटी करप्शन टीम फरार हुए ठेकेदार भूपेंद्र की तलाश में तभी से लगातार दबिश देती आ रही है, लेकिन दो सप्ताह बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी तो दूर बल्कि उसका कोई सुराग तक नहीं लग पाया है। जिससे यह सवाल काफी पेचीदा पहेली बना हुआ है कि भूपेंद्र द्वारा ले जाई गई वही रकम अब बरामद भी हो पाएगी या नहीं।
रजिस्ट्रेशन न होने के बाद भी पालिका में भूपेंद्र की बोलती थी तूती
जनपद संभल की बहजोई नगर पालिका में तैनाती के दौरान ईओ अमिता वरुण का भूपेंद्र बेहद विश्वास पात्र ठेकेदार बन गया था, जो वहां से तबादला होने के बाद ईओ को गढ़ पालिका में तैनाती मिलने पर यहां आकर सक्रिय हो गया था। अपना रजिस्ट्रेशन न होने के बाद भी भूपेंद्र की पालिका कार्यालय में खूब तूती बोलती थी, जिसके चलते ठेकेदार तो दूर बल्कि कर्मचारी भी उसे खूब सम्मान देते थे। भूपेंद्र बहजोई और बिलारी से जुड़े ठेकेदारों की फर्म में बेनामी साझीदार रहता था, जो गढ़ चौपला से मीरा रेती चौराहे तक बनाए जा रहे डिवाइडर समेत कई बड़े कामों में साझीदार है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 44 लाख कीमत वाला ब्रजघाट पार्किंग का ठेका भी भूपेंद्र ने ही चलाया था।
पालिका में भूपेंद्र की फर्म को ही मिलते थे बड़े काम
गढ़ पालिका परिषद में पंजीकृत ठेकेदारों की तादाद 40 से भी अधिक है, लेकिन उनमें महज डेढ़ दर्जन ही वर्तमान में कामकाज कर रहे हैं। ईओ से नजदीकी होने के चलते बड़े कामकाज बेनामी ढंग में भूपेंद्र से जुड़ी फर्म को ही मिलते थे।