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नलकूप बिल घोटाला:1985 से वर्ष 2003 के 60 लेजर और 70 चालान बुक गायब

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नलकूप बिल घोटाला : 1985 से वर्ष 2003 के 60 लेजर और 70 चालान बुक गायब
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हापुड़। नलकूप बिल घोटाले में जिले के 14 हजार किसानों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। वर्ष 1985 से 2003 के बीच वाले 60 लेजर और 70 चालान बुक गायब हैं। दो दशक तक चली जांच भी पूरी हो गई है, लेकिन निष्कर्ष अब भी अधूरा है। घोटाले की राशि बढ़कर 600 करोड़ के पार पहुंच गई है। इतनी राशि को बिलों से हटाने का दम कोई अधिकारी नहीं दिखा पा रहा। अब बीओडी या कैबिनेट से ही इस मामले में राहत मिलने की उम्मीद है।
बिल घोटाले की पटकथा वर्ष 1985 से ही शुरू हो गई थी, क्योंकि उस समय सब रसीदें मैनुअल ही कटती थी। हर महीने के हिसाब से एक लेजर बनता था और एक महीने में एक चालान बुक भी मिलती थी। उस दौर में रसीदों को फर्जी तरीके से काटकर कुछ कर्मचारी अपनी जेब भरते रहें। किसानों की किताबों में तब एंट्री होती थी, किसान एंट्री के बाद संतुष्ट हो जाते थे कि उनका बिल जमा हो गया है।
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मामला वर्ष 2004 में खुला तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरी। कई संस्थाओं ने इस मामले की जांच की, लेकिन निष्कर्ष नहीं निकल सका। वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने शासन में पत्राचार कर, जांच शुरू कराई। जांच के दौरान रिकॉर्ड रूम खंगाले गए। बताया गया है कि करीब 19 सालों के रिकॉर्ड से 60 लेजर और 70 चालान बुक गायब हैं। निगम के ही एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर यह आंकड़े साझा किए हैं।
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वर्ष 2004 में सिर्फ 120 करोड़ थी घोटाले की राशि-
ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2004 में जब इस घपले की परतें खुली थी तब घोटाला महज 120 करोड़ का था। इसमें 85 लाख रुपये मूल था और 35 लाख रुपये ब्याज बन रहा था। उस समय सकारात्मक जांच कर कार्रवाई होती तो किसानों को अब तक राहत मिल चुकी होती।
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अब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर या कैबिनेट से ही राहत की उम्मीद-
घोटाले की राशि 600 करोड़ से अधिक हो गई है। इतनी राशि को संशोधित करना या खत्म करना किसी स्थानीय अधिकारी के बस की बात नहीं है। ऊर्जा निगम के अधिकारी मानते हैं कि इस राशि को बिलों से हटाने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर या कैबिनेट को ही फैसला लेना होगा।
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- वर्ष 2006 में बिलों को संशोधित करने का हुआ था प्रयास
वर्ष 2006 में ऐसे बिलों को संशोधित करने का प्रयास हुआ था। उस समय ओटीएस योजना लागू थी, बहुत से किसानों की पेनाल्टी और जुड़कर आ रही बकायेदारी को खातों से हटाया गया लेकिन, मामला बढ़ा तो फिर से अधिकारियों ने हटाई गई राशि को खातों में जोड़ दिया।
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- किस डिवीजन के कितने किसान प्रभावित
डिवीजन प्रभावित किसान
गढ़मुक्तेश्वर 6546
हापुड़ 3250
पिलखुवा 2646
(नोट: इसके अलावा हजारों किसान दूसरे जनपदों के डिवीजन से जुड़ गए हैं।)
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