किसानों से पांच में लेकर बाजार में बेच रहे 30 रुपये किलो
हापुड़। मुनाफाखोरों के चुंगल में आलू उत्पादक किसान फंस गए हैं। शीतगृहों में रखे करीब 20 फीसदी (30 एमटी) आलू के खरीदार नहीं मिल रहे हैं, पांच से छह रुपये किलो ही किसानों का आलू खरीदा जा रहा है। जबकि बाजार में यही आलू 30 से 40 रुपये प्रति किलो बिक्री किया जा रहा है। नए आलू के फुटकर दाम 50 रुपये तक खोले गए हैं। ऐसे में किसानों के माल पर मुनाफाखोर सात गुना तक कमा रहे हैं। जिला प्रशासन को इसकी सुध नहीं है।
जिले में हर साल बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है, बीते महीने बरसात के दौरान आलू के दाम चटक गए थे। चिप्सौना का कट्टा 900 रुपये तक बिक रहा था। ऐसे में किसानों को और तेजी की उम्मीद थी। लेकिन बीते दो सप्ताह में ही आलू की मिट्टी पलीत होने लगी है। जिले के 15 शीतगृहों में करीब 1.80 लाख एमटी आलू भंडारित था। जिसमें करीब 80 फीसदी की निकासी हो चुकी है।
लेकिन 20 फीसदी आलू अभी भी अवशेष है, दिलचस्प बात यह है कि बाजारों में फुटकर में जो आलू 30 से 40 रुपये किलो मिल रहा है। किसानों के शीतगृहों में उस माल के खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। व्यापारी किसानों के आलू का दाम पांच से सात रुपये प्रति किलो ही लगा रहे हैं। उद्यान विभाग द्वारा शीतगृहों को खाली किए जाने का नोटिस देने के बाद से शीतगृह संचालक भी किसानों पर दबाव बनाने लगे हैं।
इस व्यवस्था में किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि उनके माल पर मुनाफाखोर सात गुना तक लाभ कमा रहे हैं। जबकि दिन रात मेहनत कर फसल उगाने वाले किसानों को किराया और मजदूरी भी हाथ नहीं लग रही है।
पंजाब का नया आलू आने से गिरे दाम
मंडी में पंजाब का नया आलू आ चुका है, जिसके दाम 800 से 1000 रुपये कट्टा चल रहा है। बाजार में यह आलू 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक्री किया जा रहा है। बिचौलियों की इस मनमानी से किसान और आम जनता दोनों के रसोईयों का स्वाद बिगड़ रहा है।
किसान की हर फसल पर बिचौलिया काट रहे चांदी
किसान खेतों में आलू, गाजर, मूली, चुकंदर, गोभी समेत सब्जियां उगाता है। मंडी में उसकी सब्जी का दाम आढ़ती तय कर देते हैं। वहीं सब्जी मंडी से बाहर बाजार में आते ही तीन से चार गुना तक दाम पर बिक्री की जाती है। ऐसे में दिनरात मेहनत करने वाले किसान से ज्यादा बिचौलिया उसकी फसल से लाभ कमा रहे हैं।
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-350 में अच्छा आलू और 93 रुपये में बिका है किररी आलू-
शीतगृहों में आलू के खरीददार नहीं मिल रहे हैं, मजबूरी में आलू का कट्टा 350 रुपये में बिक्री करना पड़ा है। किररी आलू का कट्टा सिर्फ 93 रुपये में बिक्री हुआ है। शीतगृह का किराया निकालना भी मुश्किल हो रहा है। जिले के सभी किसानों के साथ यही सौतेला व्यवहार हो रहा है।--राधेलाल त्यागी, आलू किसान व भाकियू जिला प्रभारी।
आलू की कालाबाजारी पर कार्रवाई करे प्रशासन
शीतगृहों में किसानों को आलू के खरीदार नहीं मिल रहे हैं और बाजार में फुटकर में आलू 50 रुपये किलो तक बिक रहा है। जिला प्रशासन के सामने ही यह कालाबाजारी चल रही है, किसान के आलू की बिक्री भी उसी दाम पर करायी जाए। जिला प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया तो आंदोलन होगा।--पवन हूण, जिलाध्यक्ष भाकियू।
-आलू की निकासी को लेकर शीतगृहों को दिए हैं नोटिस-
आलू की निकासी को लेकर शीतगृहों को नोटिस जारी किए हैं। किसानों ने अधिकांश आलू की निकासी कर ली है। बीते दिनों बाजार में आलू का अच्छा दाम था, उस समय अधिकांश किसानों ने आलू की निकासी कर दी।
-डॉ.हरित कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।