स्मॉग की चादर में लिपटा हापुड़, चार मीटर रही दृश्यता
हापुड़। स्मॉग की चादर ने शनिवार को और भयंकर रूप धारण कर लिया। स्मॉग छाने से सुबह के समय दृश्यता चार मीटर रही। यह हालात सुबह करीब दस बजे तक बने रहे। ऐसे में वाहनों और ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। हाईवे पर वाहन रेंगते रहे। वहीं सांस और हृदय रोगियों के लिए खतरा बढ़ गया। वहीं गर्भवती महिलाओं को बच्चों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आगामी दो से तीन दिन में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के आसार हैं।
हापुड़ में स्मॉग की चादर छाने से शनिवार को लोगों को आंखों में जलन और सांस की समस्या हुई। घरों से काम को लेकर बाहर निकले लोग आंखें मलते नजर आए। इसके अलावा सांस के रोगी बेहद परेशान रहे। लोग मुंह पर मास्क लगाकर घर से बाहर निकलते नजर आए। इसका सबसे बड़ा कारण हवा की धीमी गति मानी जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र समेत आस-पास के क्षेत्रों में जलाई जा रही पराली, कूड़ा और खुले में रखी निर्माण सामग्री भी है।
शनिवार को घरों से बाहर निकले लोगों को दम घुटने जैसी स्थिति महसूस हुई। चिकित्सक इस स्थिति से बचने के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दुष्यंत बंसल ने बताया कि वातावरण में धूल और धुएं की मात्रा अधिक हो गई है।
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इस प्रकार बनता है स्मॉग
कई प्रकार के कारणों से हवा में धुएं व धूल के कण आ जाते हैं। धुएं में भी कई तरह के कण होते हैं। सर्दी की शुरुआत होने की वजह से इस समय वातावरण में नमी अधिक है। वातावरण की नमी को धूल के कण सोख लेते हैं। इससे कण भी थोड़े से मोटे हो जाते हैं। धूल के कण बार-बार सोखने से ये वातावरण में एक मोटी परत के रुप में जमा हो जाती है और धूप नीचे तक नहीं आ पाती है।
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स्मॉग से ये होती है परेशानी
- मार्निंग वाक करने वालों को स्वच्छ वातावरण न मिलना।
- आंखों में जलन, सूजन और पलकों में इंफेक्शन होना।
- स्किन एलर्जी, जलन और खुजली जैसी शिकायत आदि।
- हाई बीपी, हृदय रोगियों के साथ श्वांस रोगियों को भी होती है परेशानी।
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छह ट्रेनें हुई लेट
स्मॉग छाने के कारण हापुड़ रेलवे स्टेशन पर आने वाली शटल ट्रेन आधा घंटा, इंटरसिटी एक घंटा, नौचंदी एक्सप्रेस 45 मिनट, राज्यरानी एक्सप्रेस एक घंटा, शहीद एक्सप्रेस दो घंटे देरी से रेलवे स्टेशन पर पहुंची। जिसके कारण यात्रियों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है मौसम
सांस के मरीजों के लिए यह मौसम बहुत ही खतरनाक है। ऐसे रोगी किसी भी कीमत पर घर से बाहर न निकलें। रोगी ही नहीं सामान्य लोग भी मास्क का प्रयोग करें। बदन पर पूरे कपड़ों का प्रयोग करें। - डॉ. जीवोत्तम नारंग फिजीशियन