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पुलिस को मिली लखन हत्याकांड के आरोपी सुनील चचूला की कस्टडी रिमांड

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पुलिस को मिली लखन हत्याकांड के आरोपी सुनील चचूला की कस्टडी रिमांड
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हापुड़। कचहरी परिसर के बाहर 16 अगस्त को हुए फरीदाबाद निवासी हिस्ट्रीशीटर लखन की हत्या के मामले में अदालत में समर्पण करने वाले आरोपी सुनील चचूला की 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड दी गई है। हांलाकि पुलिस द्वारा आरोपी का 72 घंटे का रिमांड कोर्ट से मांगा गया था।
16 अगस्त को न्यायालय में पेशी पाए आए लखन की कचहरी के मुख्य गेट के बाहर कुछ बदमाशों ने गोलियों से भूनकर कर हत्या कर दी गई थी। लखन को धौलाना में बरात में हुई हत्या के मामले मेें पेशी पर लाया गया था। बदमाश हत्या के बाद मौके से फरार हो गए थे। जबकि नामजद आरोपियों में से एक सुनील चचूला उसी दिन गौतमबुद्ध नगर की सुरजपुर कोर्ट में किसी और मामले में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया था। जिसके बाद पुलिस ने कस्टडी रिमांड के लिए न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी।
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सहायक अभियोजन अधिकारी चंद्र प्रकाश गौतम ने बताया कि पुलिस की तरफ से आरोपी सुनील चचूला के पुलिस रिमांड के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी दाखिल की। जिसमें उन्होंने कोर्ट से कहा गया कि पुलिस ने विवेचना के दौरान जिला कारागार में आरोपी सुनील के लिए गए बयान में उसने घटना करना स्वीकार किया है। साथ ही उसने अपने बयान में हत्या करने में प्रयोग की गई पिस्टल को निजामपुर बाईपास के समीप खेत में झाड़ियों में छिपाने की बात भी कही है। जिसके आधार पर पुलिस ने निजामपुर बाईपास के पास पिस्टल की काफी खोज की ली, लेकिन पिस्टल नहीं मिली। इसलिए पिस्टल की बरामदगी के लिए आरोपी सुनील को न्यायिक अभिरक्षा से 72 घंटे के लिए पुलिस अभिरक्षा में दिया जाए। रिमांड पर दिए जाने का आरोपी द्वारा अपना स्वास्थ्य खराब बताते हुए विरोध किया गया।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने आरोपी को 24 घंटे के पुलिस कस्टडी रिमांड में देने के आदेश किए। न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि यह रिमांड 29 अगस्त दोपहर 12 बजे से 30 अगस्त दोपहर 12 बजे तक है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि विवेचक अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा से पुलिस अभिरक्षा में लेने से पूर्व और पुलिस अभिरक्षा से न्यायिक अभिरक्षा में देने से पूर्व उसके शरीर का शारीरिक परीक्षण करायेगा। साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त के खिलाफ किसी थर्ड डिग्री मैथड का प्रयोग नहीं किया जाएगा और कोई उत्पीडनात्मक कार्रवाई भी नहीं की जाएगी। पुलिस अभिरक्षा में रहने की अवधि में अभियुक्त के अधिवक्ता कार्रवाई को बीस मीटर की दूरी से देख सकते हैं।
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