हापुड़। जिले की कई ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने गांवों में विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति देने की मांग की है। प्रधानों की ओर से मुख्य विकास अधिकारी श्रुति शर्मा को ज्ञापन सौंपकर सड़क, रास्ते और नाली निर्माण जैसे जनहित के कार्यों को शीघ्र मंजूरी न मिलने पर नाराजगी जताते हुए ग्रामीणों की समस्याओं को गिनाया है।
प्रशासनिक रूप से कार्यभार देख रहे ग्राम प्रधानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान गांव की समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान, विकास कार्यों के संचालन और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायतों की ओर से भेजे जाने वाले कई विकास प्रस्तावों को समय पर स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। इससे गांवों में जरूरी कार्य लंबित रह जाते हैं।
आज कई गांवों में सड़क और रास्ते खराब स्थिति में हैं। नालियों के अभाव या क्षतिग्रस्त होने से जलभराव की समस्या पैदा होती है। इससे ग्रामीणों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं से संबंधित प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी स्वीकृति नहीं मिलने से ग्रामीणों को राहत नहीं मिल पा रही है।
प्रधानों ने विद्यालयों के विकास, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा, बाल कल्याण और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को भी महत्व देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करते समय गांव की वास्तविक स्थिति, जनसंख्या, आवागमन की समस्या और जलभराव जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
ग्राम प्रधानों ने सात प्रमुख मांगें रखते हुए लंबित प्रस्तावों की समीक्षा के लिए विशेष बैठक बुलाने और संबंधित अधिकारियों व ग्राम प्रधानों के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग भी रखी।
इस दौरान योगेश्वर त्यागी, जावेद प्रधान, जहीर प्रधान, मनोज प्रधान, सुमित प्रधान, फुरकान राणा, उस्मान प्रधान और तारिक मौजूद रहे।