जिले के सरकारी अस्पतालों में जले मरीज के इलाज के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक गाजियाबाद यादिल्ली रेफर कर देते हैं।
सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा न होने पर बहुत से मरीज मजबूरी में निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। गढ़ , धौलाना, सपनावत और हापुड़ में चार सीएचसी हैं।
हालत यह है कि इन सरकारी अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवा तो मौजूद हैं लेकिन जले मरीजों के लिए कोई दवा या वार्ड की सुविधा नहीं है। ऐसे में अगर कोई जला मरीज आ जाता है तो उसे सिर्फ एंटीबायोटिक दवा ही दी जाती है।
अगर 40 प्रतिशत से अधिक जला हुआ मरीज आ जाता है तो उसे मेरठ गाजियाबाद या दिल्ली रेफर कर यहां के चिकित्सक अपनी जान छुड़ा लेते हैं। इस कारण बहुत से मरीज यहां शहर के ही निजी अस्पताल में महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। हालांकि सीएमओ दवा होने का दावा कर रहे हैं।
अभी जिलास्तर की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं इस कारण यहां सुविधाओं का अभाव है। हालांकि जले हुए मरीज के लिए जो एंटीबायोटिक दवाई मौजूद हैं प्राथमिक उपचार के समय उनसे मरीज को काफी आराम मिल जाता है।
डॉ.सुभाष चंद गुप्ता, सीएमओ