गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में शनिवार को 10 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। गंगा अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गांवों के रास्तों पर अभी भी पानी भरा हुआ है। ऐसे में बाढ़ की आशंका से ग्रामीण भयभीत हैं।
बाढ़ का प्रभाव क्षेत्र में पिछले एक माह से बना हुआ है। सर्वाधिक नुकसान फसलों को हुआ है। बाढ़ का पानी न उतरने के कारण प्रशासन किसानों की फसलों की क्षति का आंकलन नहीं कर सका है। एक माह से अधिक धान, गन्ने, सब्जी के जिन खेतों में पानी भरा हुआ है वहां फसलें सड़कर पीली पड़ गई हैं। किसान रुपचंद ने बताया कि गांवों में गंगा का काफी पानी भरा हुआ है। पानी कई दिनों से बढ़ा तो नहीं है, लेकिन कम भी नहीं हो पा रहा है। गांव को आने जाने वाली सड़क के दोनों तरफ और खेतों में भी पानी भरा हुआ है।
केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी आबाद आलम ने बताया कि शनिवार को जलस्तर 10 सेंटीमीटर कम हुआ। इससे ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर 199.07 मीटर (समुद्र तल से) दर्ज किया गया है। बिजनौर बैराज से एक लाख 12 हजार के लगभग पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, इससे जलस्तर पर कोई विशेष प्रभाव नहीं होगा। एसडीएम श्रीराम सिंह का कहना है कि जलस्तर कम होना शुरू हो गया हैं। संभवतः गंगा का उफान जल्द ही थम जाएगा। जिसके बाद नुकसान का भी आंकलन कराया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों को शासन स्तर से लगातार मदद की जा रही है।