गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में पांच दिनों के बाद सोमवार को दो सेंटीमीटर की कमी आई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में कोई राहत नहीं है। कई गांवों में अभी भी पानी भरा हुआ है। वहीं, खेत-खलिहानों में खड़ी फसलें पानी में डूबी हैं। किसानों के ईंधन (लकड़ी-कंडे आदि) और पशुओं के चारे की बुर्जियां भी पानी से घिरी हुई हैं। ग्रामीण ऐसे हालात में बेहद परेशान हैं।
पांच दिनों से गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र में गंगा का जलस्तर 198.80 मीटर (समुद्र तल से) के निशान पर चल रहा था। सोमवार की शाम क्षेत्र में जलस्तर 198.78 मीटर दर्ज किया गया। जो रविवार के मुकाबले दो सेंटीमीटर कम है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका था, वहां अभी राहत नहीं मिली है। नयागांव, भगवंतपुर, चक लठीरा, गडावली, नयाबांस समेत अन्य गांवों में एक से डेढ़ फीट तक अभी भी पानी भरा है। खेतों में धान, सब्जी, गन्ने की फसलों में भी पानी भरा है। कई दिनों से पानी भरा होने के कारण किसानों को फसलों में क्षति होने की चिंता सता रहा है। पानी भरा होने के कारण क्षति का आंकलन नहीं हो पा रहा। केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी आबाद आलम ने बताया कि सोमवार को बिजनौर बैराज से एक लाख 65 हजार 75 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एसडीएम श्रीराम सिंह का कहना है कि जलस्तर लगभग स्थिर है। जलस्तर की निगरानी कराई जा रही है। ग्रामीणों से संपर्क कर उनकी परेशानियां भी जानी जा रही हैं।