नोटबंदी के दो महीने बाद भी कुचेसर रोड चौपला स्थित सहकारी बैंक में किसानों का शोषण हो रहा है। इस बैंक से किसानों को दो हजार रुपये से अधिक नहीं मिल पा रहे हैं। बृहस्पतिवार को तीन दिन के इंतजार के बाद कुछ किसानों को महज दो हजार रुपये कैश मिल सका।
ऐसे में किसानों को फसल बुवाई करना भी मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा कर 50 दिन के अंदर लोगों को पर्याप्त कैश मिलने का वायदा किया था। चौपला स्थित सहकारी बैंक में अभी भी हालात जस के तस हैं।
इस बैंक से जुड़े दर्जनों गांवों के ग्रामीण दिनभर बैंक के बाहर कतार में लगकर कैश मिलने की बाट जोहते रहते हैं। अधिकर नो कैश का नोटिस चस्पा देख उन्हें मायूस लौटना पड़ता है। बृहस्पतिवार को तीन दिन के बाद बैंक में कैश तो बंटा।
प्रति किसान अधिकतम दो हजार रुपये ही मिल सके। महज एक घंटा में कैश खत्म होने पर लोगों को मायूस होकर घर लौटना पड़ा। गांव रसूलपुर निवासी सतेंद्र, जतिन चौधरी आदि ने बताया कि कैश किल्लत के चलते उन्हें बैंक से पैसा नहीं मिल पा रहा है।
तीन दिन में बैंक को महज दो लाख रुपये मिले थे। वह भी कुछ किसानों में बांट दिए गए। आलम यह है कि कैश किल्लत के चलते किसानों की फसल बुवाई प्रभावित हो रही है।
एलडीओ एपी चतुर्वेदी का कहना है कि सभी बैंकों में पर्याप्त कैश भेजा जा रहा है। सहकारी बैंक में कैश न बांटे जाने के संबंध में वह आवश्यक जांच करायेंगे।