हापुड़। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के बैनर तले बुधवार को किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर जिला मुख्यालय तक ट्रैक्टर मार्च निकाला और धरना प्रदर्शन किया। गन्ना भुगतान को लेकर अधिकारियों से गहमागहमी भी हुई। पदाधिकारियों ने कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र सौंपा।
जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर ने कहा कि गन्ना सीजन शुरू होने से पहले गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया जाए। सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों पर किसानों के बकाये का भुगतान कब तक होगा, इसकी समय सीमा तय की जाए। उन्होंने मांग की कि नए पेराई सत्र 2026-27 में जिस मिल को किसान गन्ना देंगे, भुगतान की जिम्मेदारी भी उसी मिल की हो। यदि संबंधित मिल 14 दिन में भुगतान नहीं करती है तो किसानों को समय से भुगतान करने वाली मिल को गन्ना देने की अनुमति दी जाए।
किसानों ने सहकारी समितियों में उनके शेयर पर ब्याज देने, गलत खतौनियों में नाम समय से सही कराने, बैनामे का दाखिल-खारिज 35 दिन के भीतर कराने और विरासत के मामलों में समय से नाम दर्ज करने की मांग की। इसके अलावा यूरिया और डीएपी खाद जमीन तथा खरीफ फसलों की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध कराने और सहकारी बैंक के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग भी रखी।
किसानों ने हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) से जुड़े मामलों को भी उठाया। उनकी मांग थी कि प्राधिकरण से पहले से बने और मान्यता प्राप्त भवनों को ध्वस्त न किया जाए। सड़क से 100 मीटर पट्टी छोड़ने के बाद किसानों की बची जमीन का नए सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाए और पूर्व की व्यवस्था के अनुसार छह प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड दिए जाएं।
किसानों ने कहा कि प्राधिकरण ने पहले भी कई भवनों को छोड़ा है, इसलिए इसी आधार पर किसानों के भवनों पर भी कार्रवाई न की जाए। धरने के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए एचपीडीए के सचिव, एसडीएम हापुड़ और संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद धरना शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कर दिया गया।
इस दौरान मोनू त्यागी, कटार सिंह, राधेलाल त्यागी, रबजीत सिंह, मनोज तोमर, कुलदीप त्यागी, जितेंद्र नागर, रवि भाटी, अशोक राणा, बबली दयानगर, अनिल हूण समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।