हापुड़। नई दिल्ली स्थित एनसीएलटी कोर्ट में किसान मंगलवार को बाजार से कम दाम पर 70 हजार क्विंटल चीनी बिक्री के मामले में अपना पक्ष रखेंगे। साथ ही आईआरपी गठन के बाद भी गन्ना भुगतान में तेजी न होने और 14 दिन के अंदर किसानों को मय ब्याज भुगतान कराने के संबंध में भी पक्ष रखेंगे।
दरअसल, सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिल मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। फिलहाल मिलों पर आईआरपी का गठन किया गया है। बैंकों से लिया ऋण समय से अदा नहीं करने पर कार्रवाई हुई है, लेकिन इसके बाद भी भुगतान व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि पहले से भी भुगतान की स्थिति बदतर हो गई है।
सोमवार को भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष पवन हूण, कटार सिंह, नरेश नागर, रवि भाटी, लीले प्रधान, अनिल हूण दिल्ली एनसीएलटी कोर्ट पहुंचे। उन्होंने अपने अधिवक्ता से मुलाकात कर मंगलवार को होने वाली सुनवाई में किसानों का पक्ष रखने की भूमिका तैयार की।
भाकियू जिलाध्यक्ष पवन हूण ने बताया कि दोनों चीनी मिलों के गोदामों से पिछले साल 70 हजार क्विंटल चीनी बाजार भाव से बेहद कम दाम पर बिक्री कर दी गई। अभी भी चीनी मिलों के गोदामों में करीब पांच लाख क्विंटल चीनी भंडारित है, हर महीने 88 हजार क्विंटल चीनी बिक्री का कोटा मिला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महीने का यह कोटा भी पूरा नहीं किया जा रहा है। ऐसे में फिर से चीनी में नमी बताकर उसे कम दाम पर बिक्री किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल भी करीब 21 करोड़ का घोटाला इसमें हुआ था। उन्होंने बताया कि मंगलवार को एनसीएलटी कोर्ट में किसानों का पक्ष रखेंगे। 14 दिन में मय ब्याज के साथ भुगतान कराने का पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।