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नामांतरण में लापरवाही: 'रिश्वत के बाद भी अटका काम, किसान की मौत'; शव रखकर हंगामा...फिर चंद मिनटों में हुआ काम

Sat, 22 Nov 2025 08:30 PM IST
राहुल तिवारी संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़

सार

हापुड़ के बझैड़ा खुर्द गांव के किसान भगवत सिंह की ढाई साल से विरासत नामांतरण लंबित था। आरोप है कि रिश्वत देने के बाद भी काम न होने से किसान की सदमे में मौत हो गई। शनिवार सुबह परिजनों ने एसडीएम कार्यालय पर शव रखकर प्रदर्शन किया।
 
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रोते बिलखते मृतक किसान भगवत सिंह के परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हापुड़ जिले के गांव बझैड़ा खुर्द निवासी किसान भगवत सिंह की शुक्रवार देर रात हृदय गति रुकने से मौत हो गई। वहीं शनिवार सुबह परिजनों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर शव रखकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कि किसान मां की मौत के बाद पिछले ढाई साल से विरासत की भूमि में नामांतरण के लिए तहसील के चक्कर काट रहे थे। रिश्वत देने के बाद भी उनका कार्य नहीं हुआ। जिससे सदमे में उनकी मौत हो गई। हंगामा हुआ तो ढाई साल से रुका कार्य चंद मिनटों में पूरा हो गया। करीब दो घंटे आश्वासन के परिजन लौटे। 

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परिजनों के अनुसार बझैड़ा खुर्द निवासी भगवत सिंह की मां भीमो देवी का निधन करीब ढाई वर्ष पहले हुआ था। विरासत में मिली भूमि का नामांतरण कराने के लिए वह अपने भाइयों प्रदुम्न, सुरेंद्र और सुभाष के साथ आवेदन कर चुके थे। सबसे बड़े भाई होने के नाते समस्त दस्तावेजों की जिम्मेदारी भगवत सिंह के ऊपर थी। परिजनों का आरोप है कि ढाई साल से वह तहसील के चक्कर काटते रहे, लेकिन कानूनगो और उनके सहायक को एक लाख 90 हजार की रिश्वत देने के बावजूद भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी कार्य नहीं कर रहे थे।

शुक्रवार को भगवत सिंह तहसील पहुंचे, जहां आरके ऑफिस में तैनात एक कर्मचारी द्वारा 15 हजार रुपये की मांग की गई। परिजनों का कहना था कि इसे लेकर वे शुक्रवार से काफी परेशान चल रहे थे। परिजनों का कहना है कि नामांतरण को लेकर लगातार हो रही टालमटोल और रिश्वतखोरी से भगवत मानसिक तनाव में थे और इसी सदमे में शुक्रवार रात उनकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई।

मृतक के बेटे दीपक ने बताया कि पिता की मौत के पीछे तहसील की भ्रष्ट व्यवस्था जिम्मेदार है। क्षुब्ध परिजन शव लेकर तहसील पहुंचे और आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों के हंगामे से अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए और सभी परिजनों की मान मनव्वल में लग गए।

किसान पिछले ढाई साल से जमीन के नामांतरण के लिए भटक रहे थे। लेकिन शनिवार को हंगामा हुआ तो एसडीएम मनोज कुमार आदि मौके पर पहुंच गए और परिजनों को शांत करने का प्रयास किया। लगभग दो घंटे तक चले हंगामे के बीच ही वर्षों से लंबित विरासत का नामांतरण कुछ ही मिनटों में पूरा कर दिया गया। ऐसे में परिजनों ने आरोप लगाया कि आखिर यह कार्य किसान की मौत के बाद ही क्यों किया गया, इससे पहले कार्य किया जाता तो शायद किसान आज जिंदा होते। एसडीएम ने परिजनों को मुआवजा सहित सभी मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शांत हो गए और किसान का अंतिम संस्कार किया। इस संबंध में परिजनों की ओर से कोई लिखित तहरीर नहीं है।
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एसडीएम धौलाना मनोज सिंह का इस मामले में कहना है कि मृतक भगवत सिंह की मां भीमो देवी के नाम 20 जून 2025 को तहसीलदार धौलाना ने आदेश पारित कर दिए थे। अंश निर्धारण के लिए किसान को अवगत कराया गया था कि साइट बंद होने के चलते यह कार्य विलंब होता चला गया। एक हफ्ते पहले ही साइट चली है। पूरे मामले में कहां लापरवाही हुई इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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