हापुड़।
विशेषज्ञ चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग का पैकेज और सेवाएं रास नहीं आ रहीं। एक साल में दो विशेषज्ञ चिकित्सक इस्तीफा देकर जा चुके हैं, जबकि 44 पदों के सापेक्ष 26 खाली पड़े हैं। दो साल से भर्ती भी नहीं निकाली गई है, सीएमओ कार्यालय से आठ बार पत्राचार किया जा चुका है। अब एमबीबीएस और एनएचएम में भर्ती चिकित्सकों के सहारे ही अस्पताल चल रहे हैं। अन्य कर्मियों के भी 280 पद खाली हैं।
जिले में अस्पतालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक एकल ही हैं। जिले की 13 लाख आबादी के हिसाब से देंखे तो स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ एक सर्जन और एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। जबकि जिले में हर महीने एक हजार से ज्यादा ऑपरेशन होते हैं और 10 हजार से भी अधिक प्रसव। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीज इन सुविधाओं को लेकर कितने परेशान होते होंगे।
पिछले एक दशक से विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा चला आ रहा है, वर्ष 2021 में भर्ती हुई। इसमें जिले को विशेषज्ञ मिले भी, लेकिन वह कुछ ही दिन रुक पाए। जनरल सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञ ने किन्ही कारणों से इस्तीफा दे दिया।
अब आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास सिर्फ एक सर्जन, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजिशियन, एक ही हड्डी रोग विशेषज्ञ है। जबकि ओपीडी में ऐसे मरीजों की प्रतिदिन संख्या हजारों में होती है। सीएमओ कार्यालय से करीब आठ बार पत्राचार किया जा चुका है। ट्रांसफर से भी कोई चिकित्सक हापुड़ नहीं आया, भर्ती को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बहरहाल, अधूरे संशाधन और बिना चिकित्सकों के ही अस्पताल चल रहे हैं।
जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति
विशेषज्ञ चिकित्सक पद कार्यरत खाली
सर्जन 6 1 5
स्त्री रोग विशेषज्ञ 8 1 7
फिजिशियन 6 1 5
रेडियोलॉजिस्ट 6 1 4
हड्डी रोग विशेषज्ञ 2 1 1
बाल रोग विशेषज्ञ 4 3 1
एनीस्थिसिया 6 3 3
अन्य स्टॉफ की स्थिति
पोस्ट पद कार्यरत खाली
नर्सिंग स्टाफ 20 12 8
चीफ फार्मासिस्ट 5 3 2
फार्मासिस्ट 40 31 9
लैब टेक्नीशियन 7 2 4
लैब असिस्टेंट 16 7 9
एलएचबी 35 0 0
बेसिक हेल्थ वर्कर 264 52 212
इन सुविधाओं की है दरकार
-जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन।
-जिले में नहीं एमआरआई की सुविधा।
-ह्दय रोगियों के इलाज की नहीं कोई सुविधा।
-जिले के किसी सरकारी अस्पताल में नहीं बर्न यूनिट। -सरकारी अस्पतालों में नहीं ब्लड बैंकों की सुविधा।
सीएमओ डॉ. सुनील त्यागी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति शासन स्तर से ही होनी है। चिकित्सकों की कमी के संबंध में लगातार पत्राचार किया जाता है। जल्द ही कुछ चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।