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Hapur News: नसबंदी के बाद भी नहीं थमा आवारा कुत्तों को आतंक

Sat, 23 Aug 2025 10:18 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। शहर में आवारा कुत्तों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। नगर पालिका ने बीते साल सालों में करीब 1500 आवारा कुत्तों की नसबंदी कराई है, बावजूद इसके गलियों और मोहल्लों में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कुत्तों के बढ़ते हमलों के कारण लोग भी परेशान हैं। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहर में इनसे निजात मिलने की आस जगी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने आक्रामक कुत्तों को शेल्टर होम में रखने और बाकी के लिए नसबंदी और टीकाकरण के आदेश दिए हैं। हालांकि, वर्तमान में शहर में कुत्तों को पकड़ने या इनकी नसबंदी की कोई व्यवस्था नहीं है। पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रफुल्ल सारस्वत के कार्यकाल में पालिका ने कुत्तों की नसबंदी का टेंडर निकाला था। उस समय भी प्रति कुत्ते की नसबंदी पर करीब 1200 रुपये खर्च हुए थे। करीब 800 कुत्तों की नसबंदी पालिका ने कराई थी, लेकिन ठेकेदार का कई सालों तक भुगतान नहीं हो सका। इसके कारण पालिका ने वर्ष 2024 तक जब कुत्तों की नसबंदी का टेंडर निकाला तो किसी ने टेंडर लिया ही नहीं। करीब आठ बार टेंडर निकालने के बाद नौवीं बार में सभासदों के धरना और हंगामे के बाद वर्ष 2025 में फिर से टेंडर हुआ। तब से लेकर अब तक करीब 700 कुत्तों को की नसबंदी कराई गई है। पिछले सात साल में करीब 1500 आवारा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है, लेकिन आवारा आतंक से शहरवासियों को छुटकारा नहीं मिल रहा है। शिवपुरी निवासी अजीत कुमार ने बताया कि रात में आवारा कुत्तों के झुंड लोगों पर हमला कर देते हैं। इससे आए दिन लोग घायल हो रहे हैं। श्रीनगर निवासी अनीता त्यागी ने बताया कि गलियों के बाहर आवारा कुत्तों का झुंड खड़ा रहता है। आने-जाने वाले लोगों पर कई बार हमला कर चुके हैं। कई बार बच्चों और बुजुर्गों के साथ हादसे हो चुके हैं। आवास विकास निवासी अमित गुर्जर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लोगों को राहत मिली है। पालिका को जल्द से जल्द खूंखार कुत्तों के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था करनी चाहिए।

पालिका के पास नहीं है पालतू जानवरों का रिकॉर्ड
नगर पालिका के अधिकारियों की लापरवाही का आलम इस कदर है कि चार साल पहले लाए गए बायलॉज को आज तक पास नहीं करा पाए हैं। बिना बायलॉज के पालतू पशुओं व जानवरों का पंजीकरण नहीं हो सकता है। यही कारण है कि शहर में कितने पालतू कुत्ते और अन्य जानवर हैं, इसका रिकार्ड पालिका के पास नहीं है। पालतू कुत्तों का पंजीकरण न होने के कारण इनकी वैक्सीन का रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में यदि पालतू कुत्ता किसी को हमला करके नुकसान भी पहुंचाता है तो अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। हालांकि, अब डीएम ने पालतू जानवरों व पशुओं के पंजीकरण कराने के आदेश दिए हैं।
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पिछले माह में हापुड़ क्षेत्र में लगी एंटी रेबीज की वैक्सीन

माह लगे टीके

मई 2575

जून 2614

जुलाई 2701


कोट -

इस बार बोर्ड बैठक में बॉयलाज पास कराया जाएगा। ताकि पालतू पशुओं का पंजीकरण हो सके। आवारा कुत्तों की नसबंदी का अभियान जारी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शेल्टर होम व अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी की जाएंगी।
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- संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी
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