दीपावली की रात शहर में खूब आतिशबाजी हुई। युवाओं ने जमकर मौज मस्ती की, लेकिन यह मौज मस्ती अपने पीछे बड़ी मात्रा में प्रदूषण छोड़ गई। दीपावली की रात सामान्य दिनों से दो गुना अधिक ध्वनि और करीब पांच गुना अधिक वायु प्रदूषण रिकार्ड किया गया।
सामान्य दिनों में हापुड़ में ध्वनि प्रदूषण करीब 45 बीबीए होता है। जबकि दीपावली की रात यह 95 बीबीए दर्ज किया गया। इसके अलावा सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण के जो आंकड़े रहते हैं, उनमें पीएम (पार्टीकुलेंट मैटर)- 2.5 की मात्रा सामान्यत:
100 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूबिक होनी चाहिए। दीपावली की रात्रि यह मानक पांच गुना अधिक 480 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूबिक रिकार्ड की गई। दीपावली से पहले यह मात्रा 315 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूबिक दर्ज की गई थी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता जेबी सिंह ने बताया कि दर्ज आंकड़े दीपावली की रात के प्रदूषण के अधिकतम स्तर के हैं जो बेहद चौंकाने वाले हैं। मनुष्य ही नहीं पशु पक्षियों के लिए भी प्रदूषण का यह स्तर खतरनाक है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह अनुसार ध्वनि प्रदूषण से कान और मस्तिष्क की नसों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। तेज आवाज से कान का पर्दा भी फटने की संभावना रहती है। इसके अलावा सांस संबंधी रोगियों के लिए वायु प्रदूषण बेहद खतराक है। आंखों में जलन, सिरदर्द व चिड़चिड़ापन समस्याएं आती हैं।
बाजार में चाइनीज लाइटों के साथ ही इस बार लोगों ने चाइनीज पटाखों से भी परहेज किया। पटाखा विक्रेताओं ने बताया कि चाइनीज पटाखे कम बिके, लोगों ने भी देशी पटाखों को वरीयता दी। जिले के बाजारों में मात्र पांच से दस प्रतिशत चाइनीज पटाखों की बिक्री हुई।