चैत्र अमावस्या पर ब्रजघाट गंगा में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
ब्रजघाट। चैत्र अमावस्या के पहले दिन बुधवार को गंगानगरी ब्रजघाट के साथ ही लठीरा और पुष्पावती पूठ के तट पर भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। अमावस्या पर्व दो दिन होने के कारण पहले दिन श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। वहीं, पालिका, पुलिस-प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहे। चैत्र माह की अमावस्या का आगमन बुधवार की सुबह आठ बजकर 25 मिनट पर हुआ। इसके उपरांत सनातन धर्म से जुड़े लोगों ने अपने घरों पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजन किया और ब्राह्मणों को दक्षिणा दी। वहीं, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों, शहरों से पहुंचे करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। लठीरा और पुष्पावती पूठ के तटों पर पहुंचे आसपास के गांवों व स्थानीय लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। गंगा स्नान के उपरांत तट पर पुरोहितों से पूजन कराकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना प्रभु से की। गंगा भक्तों ने ब्रजघाट, गढ़ नगर के प्राचीन मंदिरों में पहुंचकर अपने ईष्ट देवों की पूजा कर आशीर्वाद लिया।
- पालिका, पुलिस व प्रशासन रहा सक्रिय
बुधवार को पालिका ईओ पवित्रा त्रिपाठी ने गंगानगरी का निरीक्षण किया। उन्होंने नाव से भ्रमण कर गंगा में कराई गई बेरिकेडिंग व अन्य कार्याें का निरीक्षण कर कर्मचारियों को निर्देश दिए। इसके अलावा तट व बाजारों में पुलिस टीम भी सक्रिय रही। हाईवे पर भी यातायात व पुलिसकर्मी तैनात रहे।
गंगा तट पर भिड़े निराश्रित पशु, मची अफरा-तफरी
गंगा स्नान के दौरान कच्चे घाट की तरफ अचानक कुछ निराश्रित गोवंश आपस में भिड़ गए। चार-पांच पशु एक दूसरे को टक्कर मारते हुए इधर-उधर भागने लगे। इससे आसपास मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुरोहितों और ब्रजघाट के लोगों ने पशुओं को किसी तरह वहां से भगाया।