जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी ब्रजघाट में नहीं थम रहा गंगा का उफान। संवाद
ब्रजघाट। शनिवार को गंगा का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी खादर क्षेत्र से जुड़े हजारों परिवारों में व्याप्त बेचैनी दूर नहीं हो रही है। निचले जंगल में गंगा के उफान का पानी भरा होने से फसलों में बर्बादी के साथ ही पशुओं के चारे की किल्लत हो गई है।
उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश का सिलसिला धीमा होने के कारण बिजनौर बैराज से छोड़े जा रहे पानी में भी काफी गिरावट आई है। जिससे 24 घंटों के भीतर गंगा का जलस्तर स्थिर चल रहा है। गंगा का उफान न बढ़ने से खादर क्षेत्र से जुड़े एक दर्जन से अधिक गांवों के हजारों परिवारों की बेचैनी कुछ कम तो हुई है, परंतु समस्या जस की तस बनी हुई हैं।
चक लठीरा के प्रधान निरंजन सिंह राणा का कहना है कि गंगा का जलस्तर स्थिर होने से बाढ़ का खतरा कुछ कम हुआ है, परंतु इसके बाद भी हजारों बीघा निचले जंगल में पानी भरा होने से फसल बर्बाद हो रही है। केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी आबाद आलम का कहना है कि शुक्रवार की देर शाम से लेकर शनिवार की देर शाम तक 24 घंटों के भीतर गढ़ गंगा का जलस्तर समुद्रतल से 198.38 मीटर के निशान पर स्थिर बना हुआ है।
एसडीएम अंकित कुमार वर्मा का कहना है कि बारिश व बैराज से अतिरिक्त जल छोड़े जाने के कारण जलस्तर में उतार चढ़ाव हो रहा है। फिलहाल क्षेत्र में बाढ़ की कोई संभावना नहीं है। फिर भी प्रशासनिक स्तर से बाढ़ से निपटने को लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं।