संवाद न्यूज एजेंसी
सिंभावली। गंगा विहार कॉलोनी के राजेश्वरी स्मारक स्कूल परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को व्यास आचार्य महेश शास्त्री ने भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कथा सुनाई। इस दौरान भक्तों ने कन्यादान कर भगवान का आशीर्वाद लिया।
व्यास महेश शास्त्री ने कहा कि रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है, उनके द्वारा भेजे गए पत्र के बाद श्रीकृष्ण ने हरण कर उनके साथ विवाह किया। विवाह प्रसंग के दौरान भगवान श्रीकृष्ण-रूक्मिणी की सुंदर झांकी सजाई गई और पंडाल में मौजूद भक्तों ने कन्यादान किया। व्यास ने कहा कि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नारायण की पूजा करें, मां लक्ष्मी का आशीर्वाद स्वयं की प्राप्त हो जाएगा। महारास का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह लीला जीवात्मा के परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। जीव परमात्मा का अंश हैं, भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति ही एकमात्र उपाय है। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं, जो भी ठाकुर जी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव सागर से पार हो जाता है। इस मौके पर देवेंद्र शर्मा, सौरभ शर्मा, मनोज शर्मा, अंकुर शर्मा, गिरधर शर्मा, हर्ष, सुभाष कुमार, मोनिका, पूजा, सुमन, रेनू शर्मा, सत्यवती समेत अन्य भक्त मौजूद रहे।