‘रेप जैसे गंभीर मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों का समझौता क्यों स्वीकार किया।’ कोर्ट ने यह फटकार गढ़ थाना पुलिस को शनिवार को लगाई। गढ़ तहसील में एक गांव की नौ साल की मासूम बच्ची से रेप के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट ने पुलिस को शुक्रवार को तलब किया था।
पुलिस ने कहा कि शुक्रवार को ही रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया था। उधर, मीडिया में मामला उछलने पर शुक्रवार को बाल कल्याण न्यायपीठ की मजिस्ट्रेट अतुला शर्मा पीड़ित बच्ची के गांव पहुंचीं थीं।
ज्ञात हो कि गढ़ तहसील के एक गांव में 13 जनवरी की सुबह घर के बाहर खेल रही नौ वर्षीय बच्ची को पड़ोसी युवक आमिल गन्ना दिलाने का बहाना बनाकर खेत पर ले गया। वहां उसने बच्ची रेप किया।
घटना के बाद पीड़ित परिजन कोतवाली पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने बच्ची का मेडिकल चेकअप कराए बिना ही दोनों पक्षों में फैसला करा दिया था।
मीडिया में इस खबर के छाने के बाद हापुड़ के एडीजे सुशील कुमार त्यागी ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया और शुक्रवार को गढ़ थाना पुलिस को कोर्ट हाजिर होने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पुलिस से कहा कि रेप जैसे गंभीर मामले में उसने फैसला क्यों स्वीकार कर लिया। वह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। पुलिस ने कोर्ट के समक्ष यह तर्क दिया कि मामले में तहरीर शुक्रवार को मिली थी, इसलिए शुक्रवार को ही रिपोर्ट दर्ज की गई है।
शुक्रवार को ही बाल कल्याण न्यायपीठ मजिस्ट्रेट अतुला शर्मा भी रेप पीड़ित बच्ची के गांव पहुंची थीं। उन्होंने पीड़ित बच्ची से लंबी बातचीत की थी। उन्होंने मामले में पुलिस की घोर लापरवाही मानकर शासन को रिपोर्ट भेजने का दावा भी किया है।
गढ़ थाने के इंस्पेक्टर राजेश वर्मा का कहना है कि तहरीर मिलते ही शुक्रवार को रिपोर्ट दर्ज कर बच्ची का मेडिकल करा लिया गया था। अगले ही दिन आरोपी आमिल को कोर्ट के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया था।