दूसरों लोगों की जमीन दिखाकर कई लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले एफसीआई कर्मचारी, उसके बेटे समेत तीन लोगों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शातिरों ने ऐसी जमीनों का सौदा किया था, जिनका राजस्व अभिलेखों में रिकार्ड नहीं है। गैंग के दो सदस्य फरार हैं।
एसएचओ वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पिछले दिनों कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि पिता-पुत्र दूसरों की जमीन दिखाकर कई लोगों से करोड़ों रुपये ठग चुके हैं। विवेचना में कई नाम प्रकाश में आए। भारतीय खाद्य निगम के एक कर्मचारी का नाम भी शिकायत में शामिल था।
एसएचओ ने बताया कि शुक्रवार रात पुलिस ने काजीवाड़ा और नूरबफान गंज में छापा मारकर गैंग के मुख्य आरोपी एफसीआई कर्मी मोहम्मद कासिम, उसके पुत्र अजीम और नरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने दूसरे लोगों की जमीन दिखाकर करोड़ों रुपये ठगने की बात स्वीकार कर ली। उनके साथियों की तालश में पुलिस लगी है।
यह शातिर गैंग अपने सगे-संबंधियों को भी करीब एक करोड़ से अधिक का चूना लगा चुका है। एफसीआई में नौकरी करने वाले गैंग के सरगना मोहम्मद कासिम ने सगे भाई को भी नहीं छोड़ा और उससे 19 लाख ठगे थे।
जिससे भाई को हार्टअटैक आ गया था। इसके अलावा सिकंदराबाद, गाजियाबाद और बुलंदशहर के कई लोगों से भी ठगी की जा चुकी है। कोठीगेट निवासी हाकिम जहीरुद्दीन को तीन साल पहले उनके सगे भाई मोहम्मद कासिम ने सबली गांव में करीब तीन बीघा जमीन दिखाई थी।
जिसका सौदा 19 लाख में तय हुआ था। जहीरुद्दीन ने अपने पुत्र डा. सुहैल को अच्छी जमीन बताई। मोहम्मद कासिम ने अपने पुत्र अजीम के साथ मिलकर पिता-पुत्र को अच्छेजा गांव के पास सस्ती जमीन दिलाने का लालच दिया था।
इस जमीन का मालिक अपने साथी नरेंद्र की बताया और कहा था कि नरेंद्र को पैसों की जरूरत है। जहीरुद्दीन और डा. सुहैल ने झांसे में आकर बैनामा करा लिया। कागज के लिए तहसील आने पर फर्जीवाड़े का पता चला। तब जहीरुद्दीन को हार्टअटैक आ गया था।
डा. सुहैल का कहना था कि उसके चाचा और भाई ने विश्वासघात किया है। पंद्रह साल सराय बसारत अली निवासी महताब से 48 लाख, अपने बहनोई सिकंदराबाद निवासी फुरकान से 35 लाख और मेरठ के एक रिश्तेदार अजीम से 16 लाख रुपये की ठगी की थी।
एसएचओ वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि यह गैंग उन जमीनों का सौदा करता था। जिनका तहसील के अभिलेखों में कोई जिक्र भी नहीं था। रजिस्ट्री विभाग और बैनामा कराने वालों की भूमिका भी इस घटना में संदिग्ध है।
वरिष्ठ उपनिरीक्षक विजय कुमार ने बताया कि नरेंद्र किसी दुकान पर मुनीम का काम करता था, लेकिन मोहम्मद कासिम और अजिम ने नरेंद्र को अपने साथ काम करने और अच्छा कमीशन देने की बात कहकर मिला लिया था।
वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने बताया कि पूरे प्रकरण में एक अधिवक्ता की भूमिका भी संदिग्ध है। क्योंकि यह अधिवक्ता किसी दूसरे बैनामा लेखक के नाम से मोहर बनाकर बैनामा करा रहा था। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है।