गढ़ पुलिस ने बुधवार को विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रोटोकॉल अफसर डीएस वर्मा के हत्यारोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इस दौरान आरोपियों ने डीएस वर्मा के कुछ परिजनों से जान पहचान होने की बात स्वीकारी है। ऐसे में मामले में नया मोड़ आ गया है।
अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि कहीं प्रॉपर्टी के चक्कर में अपनों ने ही तो नहीं डीएस वर्मा की जान ले ली। पुलिस ने अब इस एंगल से भी मामले में जांच की बात कही है। बता दें कि पूर्व प्रोटोकॉल अफसर डीएस वर्मा निवासी उदयचंद मार्ग कोटला मुबारकपुर दिल्ली का 13 अक्तूबर की रात अपहरण हो गया था।
करीब तीन सप्ताह बाद नोएडा की बिसरख पुलिस ने विक्रांत उर्फ जोनी और चैनी उर्फ मोहित गुर्जर निवासी बड़ौली थाना किठौर जनपद मेरठ को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में दोनों बदमाशों ने पूर्व प्रोटोकॉल अफसर की हत्या की बात स्वीकारी थी। दोनों बदमाशों से डीएस वर्मा की कार और रिवाल्वर बरामद हुआ था।
मामले को सीमा विवाद में भी गढ़, गजरौला और मेरठ की पुलिस ने उलझाए रखा था। नोएडा जेल में बंद चल रहे दोनों आरोपियों को गढ़ पुलिस ने बुधवार को सुबह 9 बजे से शाम सात बजे तक रिमांड पर लिया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने डीएस वर्मा की गोली मारकर हत्या करने और फिर शव को नहर में फेंकने की बात कही।
जिस पर पुलिस उन्हें नहर पर ले गई और गोताखोर की मदद से मुरादनगर से लेकर मसूरी तक गंगनहर में शव की खोजबीन कराई, लेकिन पूर्व अफसर का शव नहीं मिला। इंस्पेक्टर समरजीत सिंह ने बताया कि विक्रांत उर्फ जोनी और चैनी उर्फ मोहित गुर्जर ने पूछताछ में बताया कि पट्टा भूमि को मुक्त कराने के उद्देश्य से कुछ लोगों ने उन्हें 20 लाख रुपये की सुपारी दी थी।
उन्होंने डीएस वर्मा की हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया था। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान भी आरोपियों ने यही बातें बताई थी। साथ ही उन्होंने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने डीएस वर्मा के कुछ परिजनों से भी नजदीकी होने की बात स्वीकारी है। ऐसे में अब इस आधार पर भी मामले की जांच की जाएगी।
सच्चाई सामने आने पर सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीओ सतीश चंद्र पांडेय ने बताया कि जेल से रिमांड पर लाए गए मुल्जिमों ने जो बयान दिए हैं, उन्हें आधार मानकर सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।