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पिंजड़ा लेकर तेंदुआ को तलाशती रही टीम

Thu, 05 Jan 2017 12:39 AM IST
पिंजड़ा लेकर तेंदुआ को तलाशती रही टीम
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पिंजड़ा लेकर तेंदुआ को तलाशती रही टीम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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तेंदुआ..., तेंदुआ..., ग्राम ऊंचा और इलाके के अन्य गांवों में बुधवार को भी खौफ बरकरार रहा। ग्रामीणों को पूरी रात जागकर काटने के बाद सुबह वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पिंजड़ा लेकर तेंदुआ की तलाश में भटकते रहे लेकिन वह कहीं नजर नहीं आया। नजर आया तो आगरा शहर की ओर जाते गांव गढ़ी बल्देव में उसके पद चिह्न। अब ऊंचा गांव और आगरा के बीच के इलाके में खौफ बना हुआ। हालांकि बुधवार रात को पिंजड़े में बकरे को बंधकर ऊंचा गांव में ही लगा दिया गया। 
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मंगलवार को 12 लोगों पर हमलाकर घायल करने वाले तेंदुआ को पकड़ने के लिए बुधवार को सुबह लगभग 10 बजे पिनाहट और फतेहाबाद से वन विभाग की टीम खाली हाथ पहुंची और पिंजड़ा आने का इंतजार किया। लगभग साढ़े ग्यारह बजे कर्मचारी पिंजड़े को इटावा की लायन सफारी से ट्रैक्टर ट्राली में लेकर पहुंचे और बकरे को मंगाकर पिंजड़े में बंधवाया गया। दहशत और रोमांच का भाव चेहरे पर लिए ग्रामीण भी जुट गए। वन कर्मचारियों ने पिंजड़े को खेतों में उस स्थान पर लगाया जहां मंगलवार को उसे देखा गया था। घंटों तलाशने के बाद भी तेंदुआ नहीं मिला। तभी किसी ने बताया कि गांव गढ़ी बल्देव में उसके पद चिह्न आगरा की ओर जाते हुए देखे गए हैं। इस पर वन अधिकारी पद चिह्न देखने चले गए। जो देर शाम तक नहीं लौटे। पिंजड़े के पास चार-चार की शिफ्ट में वन कर्मी तैनात किए गए हैं। जो रात भर इनकी निगरानी करेंगे। वन अधिकारियों का कहना है कि अगर एक किलोमीटर की रेन्ज में भी तेंदुआ होगा तो वह आ जायेगा। ग्रामीणों को पिंजरे के पास नहीं जाने की हिदायत दी गयी है। बता दें कि मंगलवार को कोहरा अधिक होने के कारण वन विभाग के कर्मचारी उसे नहीं पकड़ सके थे। हालांकि तब पिंजड़ा नहीं मंगाया गया था। 
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पहरा देकर कर रहे मवेशियों की रखवाली
शमसाबाद। दहशत के चलते ग्रामीण गांव के अंदर पहरा देकर मवेशियों की रखवाली कर रहे हैं। किसी की हिम्मत खेतों में काम करने जाने की नहीं हो रही है। मंगलवार रात वन विभाग ने दो कर्मचारियों की ड्यूटी खेतों में तेंदुआ पर नजर रखने के लिए लगाई थी। वह भी कुछ समय बाद गांव में जाकर सो गये। 
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शहर में तो पहले भी दहशत फैला चुका है तेंदुआ
शमसाबाद। पिछले साल आगरा शहर में तेंदुआ आ गया था। तब उसे कड़ी मशक्कत के बाद पकड़ा जा सका था। अब गढ़ी बल्देव में आगरा की ओर जाते पद चिह्न मिलने से एक बार फिर से लोग दहशत में आ गए हैं। शमसाबाद में भी पहले तेंदुआ नजर आ चुका है। बाह और पिनाहट के इलाकों में भी आए दिन तेंदुआ आने की दहशत रहती है।
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दूसरे दिन भी लापरवाह दिखा वन विभाग
शमसाबाद। मंगलवार की तरह बुधवार को भी वन विभाग तेंदुआ को लेकर पूरी तरह लापरवाह दिखा। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि मंगलवार को साढ़े चार घंटे बाद वन अधिकारी पहुंचे थे। बुधवार को दस बजे पहुंचे लेकिन खाली हाथ। हालांकि साढ़े ग्यारह बजे पिंजड़ा तो आ गया लेकिन और कोई तैयारी नहीं दिखी। आगरा और कीठम से भी टीम नहीं पहुंची। 

बाह: मऊ की मढ़ैया में तीन दिन से तेंदुआ का हल्ला
बाह। जैतपुर के मऊ की मढै़या गांव में तेंदुआ की दहशत ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। जानवर ने तीन दिन में हमले कर तीन पशु मार दिये हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार की सुबह जानवर ने पप्पू की गाय पर हमला बोल दिया। कुछ समय बाद वह मर गई। दो दिन पहले बीहड़ में चरते समय पूतई और प्रकाश की बछिया पर हमला बोला था। बाद में वह दोनों भी मर गईं। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ झोपड़ियों तक में घुस आता है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेन्द्र सिंह ने वन विभाग से जंगली जानवर को पकड़वाने की मांग की है। यमुना-चम्बल के गांवों में भी तेंदुआ की दहशत रही है। जैतपुर के मऊ की मढ़ैया गांव में जानवर ने गाय को मार डाला। वन विभाग के डिप्टी रेंजर गिरजेश तिवारी का कहना है कि इलाके में लकड़बग्घा हो सकता है। लेकिन तेंदुआ होने की कोई पुष्टि नहीं है। 
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