जिले के तीन खाद्य औषधि निरीक्षकों पर निलंबन की गाज गिरने के बाद अब सुपरवाइजर विजयपाल को भी जांच में दोषी पाया गया। प्रशासन उसे भी निलंबित कर बलिया जिले से संबद्ध कर दिया है।
पिछली 20 अक्तूबर की रात एक टीवी चैनल पर हापुड़ के तीन और बुलंदशहर के एक खाद्य औषधि निरीक्षकों का स्टिंग दिखाया गया था। जिसमें सैंपल फेल कराने के खेल का खुलासा किया गया था।
मामले को लेकर आईआईए ने खाद्य औषधि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
शासन के निर्देश पर सहायक आयुक्त (खाद्य) विजय बहादुर सिंह ने मामले की हापुड़ आकर दो दिन तक जांच की थी। उन्होंने हापुड़ के व्यापारियों से भी लिखित बयान लिए थे।
जिस पर हापुड़ जिले में तैनात तीन और बुलंदशहर जिले में तैनात एक खाद्य औषधि निरीक्षक को निलंबित कर दिया था। जांच में व्यापारियों और उद्यमियों ने सहायक आयुक्त खाद्य विजय बहादुर को बताया था कि यहां तैनात सुपरवाइजर विजयपाल दशकों से जमा है।
उनका आरोप था कि सुपरवाइजर अवैध वसूली करने के साथ साथ व्यापारियों का उत्पीड़न करता है। इस संबंध में लिखित बयान भी दिए थे। मामले में सुपरवाइजर विजयपाल को निलंबित कर बलिया जिले से संबद्ध कर दिया गया है।
आईआईए के चैप्टर अध्यक्ष अमन गुप्ता, व्यापारी नेता विजय अग्रवाल तेल वाले, लोकेश सिंह का कहना है कि खाद्य औषधि प्रशासन विभाग में भ्रष्टाचार का बोल बाला था। परेशान व्यापारियों को अब कुछ राहत मिलेगी।
ये था मामला
टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में पिलखुवा के एफएसओ रमेश चंद और गढ़ के एफएसओ केपी सिंह यह दावा करते दिखे कि वे प्राइवेट कंपनी का धंधा जमाने के लिए दूसरी कंपनी का सैंपल फेल करवा सकते हैं।
लैब में नमूना कौन सा भेजा जाएगा, यह फूड सेफ्टी विभाग तय करेगा। एफएसओ सेटिंग के लिए एक लाख रुपये खर्च की बात करते हैं।
स्टिंग में हापुड़ और बुलंदशहर के एफएसओ को भी दिखाया गया था। इसके बाद सहायक आयुक्त (खाद्य) विजय बहादुर सिंह ने हापुड़ आकर उद्यमियों और व्यापारियों से बयान लिए थे।