जिला अज्ञात लाशों का डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है। बदमाश शवों को ठिकाने लगाने के लिए इसको सबसे मुफीद जगह मान रहे ह ैं। लगातार अज्ञात शव मिलने के बावजूद पुलिस न तो अज्ञात लाशों की पहचान करा सकी है और न ही लाश फेंकने वालों तक पहुंच पाई है।
फाइलों में पुलिस भले ही दिनरात क्षेत्र में राउंड लगाने का दावा कर रही हो, लेकिन हालात खाकी को ठेंगा दिखा रहे हैं। सात माह में 15 अज्ञात शव मिल चुके हैं। इनमें से पुलिस एक की भी शिनाख्त नहीं करा सकी है।
गंगा किनारे का खादर क्षेत्र और एनएच होने के कारण हापुड़ की भौगोलिक स्थिति बदमाशों के अनुकूल है। वह इसका भरपूर फायदा भी उठा रहे हैं। हालात यह हैं कि बदमाश हत्या कर शवों को हापुड़ में फेंकना सुरक्षित मान रहे हैं।
यहां की पुलिस न तो अज्ञात लाशों की पहचान की कोशिश करती है और ही शव फेंकने वालों को पकड़ने का। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनवरी से जुलाई 2016 के बीच जिले में 15 लावारिश शव मिल चुके हैं, लेकिन पुलिस एक की भी पहचान नहीं करा सकी है।
इन 15 शवों में से आधा दर्जन महिलाओं के थे, जबकि एक मासूम बालक और शेष पुरुषों हैं। पुलिस शवों की पहचान के लिए उनके बिसरे, फोटोग्राफ आदि से परिजनों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। लेकिन सात महीनों में नतीजा सिफर है।
अपर पुलिस अधीक्षक रामनयन यादव का कहना है कि जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। उनके लिए पुलिस हरसंभव प्रयास कर रही है। पूरा प्रयास है कि जल्द मृतकों के परिजनों तक पहुंचा जाएगा।