डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों के फर्जीवाड़े में बुलंदशहर के एक सरकारी बैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। निवेशकों को बाकायदा उनके पैसों की गारंटी स्टांप पेपर व बांड के माध्यम से दी गई।
दो मार्केटिंग कंपनियों पर एसटीएफ के शिकंजे के बाद से निवेशकों के खाते में पैसा आना बंद हुआ तो उन्होंने बैंक से पैसा मांगा, लेकिन अब बैंक अफसर ग्राहकों को टरकाने का प्रयास कर रहे हैं। मामला अब तूल पकड़ने लगा है।
उल्लेखनीय है कि जिले में कई डिजिटल मार्केटिंग कंपनियां बीते छह महीने से सक्रिय थीं। कंपनी निवेशकों को इंटरनेट के माध्यम से रोजाना क्लिक वर्क दिया करती थी, इसके बदले मोटी रकम निवेशकों के खातों में भेज दी जाती थी।
इन कंपनियों पर निवेशकों का भरोसा इस कदर बढ़ा था, कि वह बेहद जरूरी चीजों को गिरवी रख भी पैसा इनवेस्ट कर रहे थे। इस भरोसे का मुख्य कारण यह था कि एक मार्केटिंग कंपनी (एडमिल) में निवेश करने पर निवेशकों के पैसों की गारंटी बुलंदशहर के मोतीबाग स्थित पंजाब नेशनल बैंक ने ले रखी थी।
लेकिन एसटीएफ द्वारा 37 अरब की ठगी का पर्दाफाश होते ही, उक्त कंपनी ने भी निवेशकों को क्लिक वर्क और पैसा भेजना बंद कर दिया। कई दिन तक वर्क नहीं आने और एसटीएफ की कार्रवाई से निवेशकों की सांसे अटक गई हैं।
बता दें कि हापुड़ के भी सैकड़ों निवेशक इस कंपनी से जुड़े हुए थे, जिनके पैसे की जिम्मेदारी बैंक ने ली थी। अब परेशान निवेशक बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें आज कल की बात कहकर टरका दिया जा रहा है, इससे निवेशक परेशान हैं।
वहीं, बुलंदशहर एलडीएम सतपाल मेहता ने बताया कि कंपनी का जितना पैसा उनके बैंक में जमा था। निवेशकों के उतने पैसे की ही गारंटी ली गई थी। हालांकि, संबंधित शाखा के अधिकारियों से इस संबंध में वार्ता की जा रही है।