सुविधाजनक यातायात के लिए बनाए नेशनल हाईवे पर अनियंत्रित रफ्तार लोगों की मौत का सबब बन रही है। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र में 2017 में अब तक 39 जिंदगी दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ चुकी है। साथ ही साठ से अधिक लोग अपंग हो चुके हैं।
फिर भी पुलिस तेज रफ्तार वाहनों के चालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। बृहस्पतिवार रात पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के छिजारसी कट के पास बाइक सवार दो युवकों की मौत का मामला पहला नहीं है।
इससे पहले भी हाईवे पर आये दिन बेकाबू वाहन कितने ही लोगों को मौत का शिकार बना चुके हैं। अधिकांश हादसों का मुख्य कारण तेज रफ्तार ही होती है। पिलखुवा क्षेत्र में हाईवे पर गाजियाबाद, हापुड़, दिल्ली, बुलंदशहर,
मेरठ सहित अनेक स्थानों के 39 लोगों की वर्ष 2017 के जनवरी माह से अब तक मौत हो चुकी है। जबकि साठ से अधिक लोग अपंग हो चुके हैं। स्थानीय लोगों ने तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
डॉ सतीश वर्धन, डॉ पंकज शर्मा, प्रवीन प्रताप राधे, प्रवीन मित्तल का कहना है कि कई बार तो बाइक पर सवार स्टूडेंट्स हाईवे पर खुलेआम मस्ती करते रहते हैं। हाईवे पर बीचों बीच बाइक को घुमा देते हैं। पुलिसकर्मियों को ऐसे वाहन चलाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
ये हैं एक्सीडेंट प्वाइंट- पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र में अनवरपुर कट, डूहरी पेट्रोल पंप, लाखन कट, छिजारसी के पास और जिंदल कट के पास सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं।
समय समय पर शिविर लगाकर वाहनों के चालकों को तेज गति से वाहन चलाने के नुकसान बताये जाते हैं। उन्हें जागरूक किया जाता है। जल्द इस संबंध में अभियान चलाया जायेगा और तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी ताकि हादसों में कमी आ सके। दीपक त्यागी, कोतवाल पिलखुवा