हापुड़। उर्वरक माफिया पर शिकंजा कसते ही जिले में यूरिया की खपत 11 फीसदी तक कम हो गई है। रबी सीजन में लगभग 49 हजार और खरीफ में लगभग 75 हजार यूरिया बैग का इस्तेमाल घटा है। ये आंकड़े शासन से जारी हुए हैं। रिपोर्ट बताती है कि अब अनुदान पर जिले को आवंटित यूरिया का प्रयोग खेती में हो रहा है। इस दौरान दस से अधिक लाइसेंस रद्द किए गए हैं और एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करने और फसलों को अच्छा पोषण देने के लिए यूरिया का प्रयोग किया जाता है। सरकार किसानों को यूरिया पर सब्सिडी भी देती है। हापुड़ में उर्वरक माफिया किसानों के नाम पर उर्वरक दर्शाकर इसे बाहर जिलों में बिक्री कर देते थे।
प्लाईवुड फैक्टरी समेत कई इकाइयों में अनुदानित यूरिया का प्रयोग होता था। अनुमान के अनुसार हापुड़ में हर साल यूरिया के एक लाख बैग की कालाबाजारी होती थी। इस वजह से किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया नहीं मिल पाता था।
शासन की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ सीजन में वर्ष 2024-25 में जिले के अंदर यूरिया की खपत 31,410 मीट्रिक टन थी। इस साल घटकर यह 28 हजार मीट्रिक टन रह गई। आंकड़ों के अनुसार करीब 75 हजार यूरिया बैग की खपत कम हुई है। रिकॉर्ड से मिलान करने पर अधिकारियों को पता चला है कि माफिया हापुड़ के लिए आवंटित यूरिया को फैक्टरियों के लिए दूसरे जिलों में सप्लाई कर देते हैं।
दो साल के अंदर उर्वरकों की खपत की स्थिति
वर्ष रबी सीजन में खपत खरीफ सीजन में खपत
2024-25 19403 एमटी 31410 एमटी
2025-26 17206 एमटी 28000 एमटी
(नोट:रबी सीजन में करीब 49 हजार और खरीफ सीजन में करीब 75 हजार यूरिया बैग की खपत घटी है।)
किसानों को 266.50 रुपये का मिलता है यूरिया, वास्तविक कीमत है करीब 2100 रुपये
यूरिया (45 किलोग्राम) के एक बैग पर शासन से किसानों को करीब 1830 रुपये तक का अनुदान मिलता है। एक बैग की वास्तविक कीमत करीब 2100 रुपये है। किसानों को यह 266.50 रुपये में मिलता है। यही कारण है कि फैक्टरियों में अनुदानित यूरिया को खपाया जाता है।
हापुड़ से कई प्रदेशों में यूरिया की कालाबाजारी के मिले थे प्रमाण
पिछले दिनों जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश ने गढ़ रोड स्थित एक ट्रेडिंग कंपनी पर छापा मारा। इस दौरान यहां से यूरिया की कालाबाजारी कई प्रदेशों में किए जाने के प्रमाण मिले थे। मोदीनगर रोड पर भी नकली एनपीके के तीन गोदाम सील कराए गए थे।
हापुड़ समेत कई जिलों में घटी है खपत
शासन से जारी रिपोर्ट के अनुसार हापुड़ के अलावा प्रयागराज, गोंडा, मथुरा, आजमगढ़, गाजीपुर में भी यूरिया की खपत कम हुई है। कार्रवाई के दौरान हापुड़ से यूरिया इन जिलों में भी भेजे जाने के प्रमाण मिले थे।
जिले में वर्तमान में उपलब्ध उर्वरकों की स्थिति
यूरिया6682 मीट्रिक टन।
डीएपी4553 मीट्रिक टन।
एनपीके1369 मीट्रिक टन।
एमओपी188 मीट्रिक टन।
उर्वरक माफिया पर सख्ती का असर
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश ने बताया कि जिले में उर्वरक माफिया पर लगातार कार्रवाई का ही परिणाम है कि यूरिया की खपत में कमी आयी है। अब किसानों को जितना यूरिया चाहिए, उन्हें आसानी से मिल रहा है।