हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने नाबालिग पोती के साथ दादा द्वारा दुष्कर्म करने के मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से सुनवाई की और मात्र 26 दिन में सुनवाई पूरी कर बृहस्पतिवार को निर्णय सुनाया। जिसमें कोर्ट ने मामले के आरोपी दादा को राक्षसी प्रवृत्ति का बताते हुए दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (जीवन की अंतिम सांस तक) की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 80 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
हापुड़ नगर कोतवाली क्षेत्र मोहल्ला निवासी व्यक्ति ने बहादुरगढ़ थाने में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसका छोटे भाई व उसकी पत्नी की करीब 14 वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद उसके भाई के बच्चों को उनका फूफा कैलाश निवासी गांव खेड़ा थाना बहादुरगढ़ अपने साथ ले गया था। उसकी भतीजी आरोपी कैलाश की रिश्ते में पोती लगती थी, जिसकी उम्र 16 वर्ष थी। आरोपी कैलाश ने नाबालिग पोती के साथ आठ महीने तक दुष्कर्म किया। जिससे वह गर्भवती हो गई। जिसके बाद आरोपी उसकी भतीजी को उनके घर छोड़ गया। इसके बाद पीडि़ता ने पूरे मामले की जानकारी अपनी चाची को दी।
पुलिस ने आरोपी कैलाश के खिलाफ पॉक्सो, दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और मामले के आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट चल रही थी।
अभियुक्त ने किया राक्षसी प्रवृत्ति का आपराधिक कृत्य
न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बृहस्पतिवार को मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने आदेश में कहा कि अभियुक्त कैलाश को बिना माता-पिता की अबोध बालिका के प्रति न केवल सहानुभूति होनी चाहिए थी, बल्कि सुरक्षा व देखभाल का भी सामाजिक व पारिवारिक दायित्व उसे निभाना चाहिए था। लेकिन इस सबसे इतर रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करते हुए अभियुक्त कैलाश ने अपनी उम्र और पीडि़ता की स्थिति व परिस्थिति को नजरअंदाज करते हुए यह राक्षसी प्रवृत्ति का आपराधिक कृत्य किया है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में अर्थदंड की समस्त धनराशि पीडि़ता को देने के लिए भी कहा है।
आरोपी को नहीं मिली जमानत
नाबालिग पोती के साथ दुष्कर्म करने के मामले को न्यायालय ने बेहद गंभीरता से लिया। जिसके चलते न्यायालय ने मामले की समस्त सुनवाई के दौरान आरोपी को जमानत तक नहीं दी। ऐसा होने से आरोपी मामले की पूरी सुनवाई के दौरान जेल में ही बंद रहा है।
पीडि़ता को एक लाख रुपये देने के आदेश-
न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीडि़ता के पुनर्वास के लिए एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि देने के भी आदेश किए है। साथ ही आदेश में यह भी कहा है कि प्राधिकरण के पास प्रतिकार की धनराशि देने के लिए फंड न होने पर जिलाधिकारी राज्य सरकार से उक्त धनराशि प्राप्त कर एक माह के अंदर दे।