हापुड़। सीसीएसयू की वीसी प्रो.संगीता शुक्ला ने कहा कि एसएसवी कॉलेज की साख बुलंदियों को छूनी चाहिए। नैक निरीक्षण की तैयारी करें, विश्वविद्यालय से हर संभव सहयोग मिलेगा। छात्रों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की मुहिम चलाएं, छात्रों के लिए नए कोर्स कॉलेजों में लाएं। शिक्षा का जितना प्रसार होगा, राष्ट्र उतना ही मजबूत बनेगा।
प्रो.संगीता शुक्ला बृहस्पतिवार को हापुड़ के गांव दहरा में लाइब्रेरी के लिए जन जागरण अभियान पैदल यात्रा और पिपलेड़ा में लाइब्रेरी का निरीक्षण करने के बाद एसएसवी पीजी कॉलेज पहुंची थी। इस दौरान कॉलेज में परीक्षाएं चल रहीं थी। वह सीधे परीक्षा कक्ष पहुंची, वहां व्यवस्थाओं को परखा। जिसमें वीसी संतुष्ट दिखी।
इसके बाद कॉलेज कैंपस का भ्रमण किया। ई-लाइब्रेरी, प्रयोगशाला और कक्षाओं का भी निरीक्षण किया। कॉलेज का माहौल उन्हें पसंद आया। इसके बाद प्राचार्य कक्ष में शिक्षकों के साथ बैठक की। उन्होंने प्राचार्य प्रो.नवीन चंद्र से नैक निरीक्षण के बारे में पूछा। जिसमें प्राचार्य ने बताया कि नैक निरीक्षण की तैयारियां पूरी हैं, नवंबर महीने में निरीक्षण होगा।
वीसी प्रो.संगीता शुक्ला ने कहा कि नैक में एक या एक प्लस ग्रेड मिले, इसके लिए तैयारियां भी अच्छी होनी चाहिए। सीसीएसयू को इस बार ए प्लस प्लस ग्रेड मिला है। इस श्रेणी में आने पर कॉलेजों में बहुत सी सुविधाएं बढ़ जाती हैं। छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि नैक निरीक्षण की तैयारियों में यदि किसी तरह की परेशानी आए तो बताएं, विश्वविद्यालय इसमें पूरा सहयोग करेगा।
इस मौके पर सीसीएसयू कैंपस के डीन प्रो.भूपेंद्र राणा, चीफ प्रोक्टर वीरपाल सिंह, छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक प्रो.नीरज सिंहल, पूर्व प्रो वीसी प्रो.वाई विमला, एसएसवी कॉलेज के डीन डॉ.नीनू अग्रवाल, चीफ प्रोक्टर डॉ.सुदर्शन त्यागी, डॉ.सुबोध शर्मा, डॉ.दुष्यंत चौहान, डॉ.प्रदीप चौधरी, डॉ.मितेंद्र गुप्ता, डॉ.योगेंद्र, डॉ.दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।
-नैक को समझें-
नैक यूजीसी की एजेंसी है जो सात सिद्धांतों के आधार पर कॉलेजों को ए,बीऔर सी ग्रेड देती है। इसमें संबंधित संस्थान के पाठ्यक्रम पहलु, शिक्षण व मूल्यांकन पद्धति, अनुसंधान-परामर्श व विस्तार कार्यक्रम, बुनियादी ढांचा व संसाधन, छात्र समर्थित व विकास गतिविधियां, प्रशासन व नेतृत्व और नवाचार के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।
-इस तरह की मिलती हैं सुविधा-
नैक मूल्यांकन के ग्रेड के आधार पर कॉलेज के स्तर पता चलता है। छात्रों के उच्च शिक्षा में जाने और नौकरी में भी इसका प्रभाव पड़ता है। विभिन्न एजेंसियों से रिसर्च व अन्य कार्यक्रमों के लिए मिलने वाली फंडिंग में भी ये ग्रेड मददगार होता है।