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कैंसर का कहर: तिल-तिल कर मर रहे लोग, प्रशासन बेखबर

Mon, 12 Jun 2017 10:27 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
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कैंसर का कहर - फोटो : अमर उजाला
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अल्लाबख्शपुर गांव। एक ऐसा गांव जहां के लोग दूषित पानी पीने के कारण तिल तिल कर मरने को मजबूर हैं। गांव में रविवार देर रात कैंसर से एक और महिला की मौत हो गई। इससे पहले महज तीन सप्ताह गांव में 11 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग कैंसर से पीड़ित हैं।
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बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सीएमओ पिछले पंद्रह दिन से गांव में जांच के लिए टीम भेजने का आश्वासन दे रहे हैं।

ब्रजघाट गंगानगरी से जुड़े अल्लाबख्शपुर गांव का भूजल दूषित होने से नौ हजार की आबादी को हैंडपंपों से निकल रहा दूषित पानी पीना पड़ रहा है। इससे गांव में कैंसर और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
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किसान अफरोज खां की पत्नी फरजाना (53) की रविवार देर रात मौत हो गई। फरजाना पांच बच्चों की मां थीं। पांच महीने पहले एम्स में उन्हें लीवर कैंसर की पुष्टि हुई थी। अफरोज खां ने बताया कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ समेत कई जगह के चिकित्सकों से इलाज कराया गया।

इलाज में जमा पूंजी और खेत आदि भी बिक गए लेकिन फरजाना की जान नहीं बच पाई। बकौल अफरोज दूषित पानी पीने के कारण फरजाना को कैंसर हुआ।

तीन सप्ताह में 11 लोगों ने तोड़ा दम
26 मई तक महज तीन सप्ताह के भीतर ही कैंसर से गांव में महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से आस मोहम्मद, शरीफ, बुंदू, इलियास, कनीज, महफूदा, अफसरी, शफातुल्ला, इदरीस, खालिद, संतबीर शामिल हैं।

कई मरीजों की हालत गंभीर
शमशाद, मरगूब, अफसाना, मुस्तकीना, फरजाना, खलील, तौसीफ, जब्बार, नरेश समेत करीब दो दर्जन ग्रामीण बीमारी की चपेट में हैं। इनमें से अधिकतर को मेरठ-दिल्ली के अस्पतालों के चिकित्सकों ने जवाब दे दिया है।

सब कुछ बिक गया लेकिन नहीं बची जान
अल्लाबख्शपुर गांव में रहने वाले अधिकांश परिवारों की जीविका छोटी जोत की खेती या मजदूरी पर निर्भर है। इसके बाद भी मरीजों के इलाज में परिजनों ने कोई कोताही नहीं बरती।

कई परिवारों को अपनी जमीन-जायदाद बेचनी पड़ी या गिरवी रखनी पड़ी। इलाज पर लाखों की रकम खर्च करने के बाद भी उनके मरीजों की जान नहीं बच पाई।

दूषित भूजल है वजह
प्रधान पति फराहीम हारून, आसमुहम्मद चौधरी, हाजी वसीयत, रिफाक खां, इस्लाम चौधरी, राजवीर, महावीर प्रजापति, कमल सिंह का कहना है कि गांव का भूजल लगातार दूषित होता जा रहा है। हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहे हैं।

टंकी न होने से ग्रामीणों को इसी पानी का इस्तेमाल करना पड़ा रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।

प्रो. अब्बास अली कहते हैं कि फैक्ट्रियों के दुष्प्रभाव से भूजल दूषित हो रहा है, जो कैंसर की वजह बन रहा है। जमीन में तीन सौ फुट तक पानी दूषित होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी सेहत महकमा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है।

चैन की नींद सो रहे अधिकारी
अमर उजाला ने 28 मई के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, स्थानीय प्रशासन समेत सेहत महकमे के अफसरों में हड़कंप मच गया था। अफसरों के तमाम दावों के बाद भी आज तक किसी भी विभाग की टीम गांव में जांच के लिए नहीं पहुंची है।

फिर अधिकारी से मिला आश्वासन
एसडीएम मीनू राणा ने कहा कि जनहित के मामलों में कोई भी लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का कैंप लगवाकर मरीजों का परीक्षण कराया जाएगा। साथ ही जल निगम से भूजल की जांच कराकर जरूरत सामने आने पर गांव में टंकी निर्माण की डिमांड भी भिजवाई जाएगी।
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