गंगा भक्तों को होने वाली दिक्कतों से निजात दिलाने को पालिका प्रशासन ने नावों के लाइसेंस से जुड़ी नियमावली बनाई थी। लेकि न उस पर कोई अमल न हो पाने से गंगा भक्तों की समस्या जस की तस बनी है।
ब्रजघाट गंगा किनारे बड़ी तादाद में नावों की भरमार रहती है। इससे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों समेत डुबकी लगाने आने वाले भक्तों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
नावों की भरमार होने से भक्तों को डुबकी लगाने के लिए गहरे पानी में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस कारण अक्सर अनहोनी जैसी घटनाएं होती रहती है। इसके अलावा भी नाबालिग बच्चों द्वारा नाव चलाने से हर समय खतरा बना रहता है।
इसको देखते हुए पालिका प्रशासन ने पिछले साल ज्येष्ठ दशहरा गंगा स्नान मेले के मौके पर नावों के संचालन से जुड़ी नियमावली बनाई थी। इसके तहत नाविक को पालिका से जारी लाइसेंस नंबर समेत अपना नाम, पता, उम्र, किराया दर, नाव में बैठने वालों की क्षमता का पूरा विवरण नाव पर अंकित कर रखना होगा।
नाव चलाने वाले को पालिका स्तर से निर्धारित ड्रेस कोड और पहचान पत्र गले में डालकर रखना होगा। नाव में धूम्रपान, तंबाकू अथवा मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित रहेगा।
नाव का संचालन पालिका द्वारा तयशुदा पांच स्टैंडों से ही किया जाएगा। नाव को साफ-सुथरा रखने के साथ ही उसमें रंगाई-पुताई चाक चौबंद रहेगी। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि पालिका के नियमों की अनदेखी करने वालों के लाइसेंस निरस्त कर उनकी नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।
लेकिन इस नियमावली पर कोई अमल नहीं हो पा रहा है। ईओ पूर्णिमा सिंह का कहना है कि नाव संचालन से जुड़ी नियमावली का पूरी सख्ती के साथ पालन कराया जाएगा। किसी भी रूप में इसकी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।