कार्तिक पूर्णिमा मेला स्थल के निरीक्षण के दौरान नक्शा देखती डीएम। संवाद
गढ़मुक्तेश्वर। कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेले की तैयारियों को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी कविता मीना और मुख्य विकास अधिकारी श्रुति शर्मा ने मेला स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि मेले में श्रद्धालुओं के डेरे और शिविर जिला पंचायत की तरफ से तैयार किए जाने वाले नक्शे के अनुसार ही लगवाए जाएंगे। निर्धारित नक्शे के दायरे से बाहर किसी को भी पड़ाव डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, मेला स्थल पर मेरठ के कुछ भाकियू कार्यकर्ताओं ने डेरा भी डालना शुरू कर दिया है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र में तैयार किए जा रहे मार्गों की स्थिति देखी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि चार दिन के भीतर मेला स्थल के सभी मार्गों को तैयार कर लिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी न हो। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए उन्होंने व्यवस्थाओं को समय से पूरा करने पर जोर दिया। साथ ही अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने गंगा के किनारे पहुंचकर कटान की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक प्रबंध करने को कहा, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मेला क्षेत्र की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों।
भाकियू कार्यकर्ता और प्रशासन के बीच हुई नोकझोंक
मेले में डेरे लगाने के लिए जगह आवंटित करने को लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के मेरठ जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी और जिला पंचायत के एएमए के बीच नोकझोंक भी हुई। भाकियू कार्यकर्ताओं का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में मेरठ सेक्टर के लिए जगह कम पड़ सकती है। उन्होंने मेरठ सेक्टर को आगे बढ़ाने की मांग उठाई। वहीं, प्रशासन ने उनसे कहा कि बिना आवंटन के डेरे नहीं डाले जा सकेंगे, जिस पर वह भड़क गए। इस पर जिलाधिकारी ने बैठक कर कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया और स्थिति को शांत कराया।
मुख्य स्नान घाट पर जगह कम पड़ने की आशंका, अतिरिक्त घाट बनाने होंगे
कार्तिक पूर्णिमा मेले में इस बार मुख्य स्नान घाट पर जगह कम पड़ने की आशंका है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला पंचायत को अन्य स्थानों पर भी स्नान घाट तैयार करने होंगे। इससे मुख्य स्नान के दौरान भीड़ का दबाव कम करने और श्रद्धालुओं को स्नान की सुविधा देने में मदद मिलेगी। घाटों के निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को समय से पूरा करना प्रशासन के लिए चुनौती रहेगा।