उपैड़ा के नलकूप किसान को भेजा 1.25 लाख का बिल, हालत बिगड़ी
हापुड़। बिजली निगम के अधिकारी अपनी कमी छिपाने के लिए नलकूप किसानों को फर्जी बकायेदारी के बिल भेज रहे हैं। ऐसा ही मामला उपैड़ा के किसान के साथ हुुआ, उसे 1.15 लाख का बिल भेजा गया है, जबकि बकायेदारी सिर्फ 20 हजार रुपये की है। बिल देखकर किसान की हालत भी बिगड़ गई। परिजनों ने उसका उपचार कराया इसके बाद पीड़ित ने डीएम से शिकायत कर, कार्रवाई की गुहार लगाई है।
गांव उपैड़ा निवासी कुलदीप चौधरी पुत्र धर्मवीर सिंह ने बताया कि उसके ऊपर बिजली निगम की 20 हजार रुपये बकायेदारी है। जब वह काउंटर पर बिल निकलवाने पहुंचा तो उसे 1.25 लाख की बकायेदारी का बिल भेज दिया गया। इसे देख कुलदीप की तबीयत बिगड़ गई। क्योंकि खेतीबाड़ी कर वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। ऐसे में इतनी अधिक राशि का बिल वह कैसे जमा करेगा।
मुख्य बात यह है कि मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद भी राहत नहीं दिलायी जा रही है। इससे परेशान किसान ने डीएम से शिकायत कर, कार्रवाई की गुहार लगाई है।
बता दें कि यह समस्या जिले में हजारों किसानों के साथ है। निगम में हुए करोड़ों के घोटाले के बाद से यह फर्जी बकायेदारी बिलों में जुड़कर आ रही है। इसकी जांच बीते एक दशक से चल रही है, लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका है।
अरबों का घोटाला किसानों के लिए बना नासूर
पावर कॉरपोरेशन के हापुड़ डिवीजन कार्यालय में हुए अरबों के घोटाले की आग में जिले के हजारों किसान जल रहे हैं। आलम यह है कि पूरा बिल जमा करने के बाद भी किसानों पर लाखों रुपये की बकायेदारी जुड़कर आ रही है। बता दें कि राजस्व रसीदों और नलकूप के लेजर में हेराफेरी कर, अरबों का घोटाला किया गया है। जिसकी जांच पूरी न होने के कारण लगातार घोटाले किए जाते रहे हैं। इस घोटाले में निगम के तत्कालीन अधिकारियों से लेकर कई कर्मचारियों पर भी आरोप लगे हैं। लेकिन जांच में लापरवाही के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ईओड्ब्ल्यू के अलावा प्रबंध निदेशक के स्तर से भी इसमें जांच चल रही है लेकिन यह जांच भी पूरी नहीं हो पाई है। हाल ही में डीएम ने मामले में शासन को कमेटी गठित कर जांच जल्द से जल्द पूरी कराने व दोषियों पर सख्त कार्रवाई को पत्र लिखा है। लेकिन जब तक यह जांच पूरी नहीं होगी तब तक भोले भाले किसान इस घोटाले में घिरे रहेंगे।
कोट-
अधीक्षण अभियंता यूके सिंह का कहना है कि घोटाले के संबंध में उच्चस्तरीय जांच चल रही है। हालांकि किसान के बिल को संशोधित करा दिया जाएगा। यदि किसान का बिल जमा है तो उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है।