जांच के घेरे में पावर कॉरपोरेशन के हापुड़ डिवीजन की 10 कैश आईडी
हापुड़। पावर कॉरपोरेशन के गढ़मुक्तेश्वर डिवीजन में पुरानी रसीदों के जरिए 67 लाख के घोटाले के बाद निगम में भूचाल आ गया है। हापुड़ डिवीजन की 10 कैश आईडी को भी जांच के घेरे में लिया गया है। अधिकारी सतर्कता के साथ कंट्रोल डिपोजिट, सीएम-311 से एक एक रसीद का मिलान करा रहे हैं। इसके अलावा पुराने रिकॉर्ड को भी खंगालना शुरू कर दिया गया है। राजस्व वसूली के लिए शहर, देहात में लगाए जाने वाले कैंपों में आने वाले रुपयों का भी पूरा हिसाब लिया जा रहा है।
बता दें कि हापुड़ जिले में पावर कॉरपोरेशन के तीन डिवीजन हैं। हापुड़ डिवीजन कार्यालय में पहले ही 225 करोड़ रुपये का घोटाला किया जा चुका है। जिसकी जांच बीते एक दशक से चल रही है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, आज भी घोटाला करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। जबकि बिल की धनराशि जमा करने के बावजूद उपभोक्ताओं पर लाखों रुपये की फर्जी बकायेदारी दिखायी जा रही है।
यह मामला अभी दबा नहीं है, ऐसे में गढ़मुक्तेश्वर डिवीजन कार्यालय में 67 लाख रुपये का नया घोटाला सामने आ गया। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार की आंच में जल रहे पावर कॉरपोरेशन को भ्रष्ट कर्मचारी गर्त में ले जाने का कार्य कर रहे हैं। बहरहाल, गढ़ डिवीजन में हुए घोटाले के बाद अब हापुड़ डिवीजन में भी अधिकारियों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
हापुड़ डिवीजन में राजस्व जमा कराने के लिए दस कैश काउंटर खुले हैं। इनमें आठ शहर व दो देहात अंचल में है। प्रत्येक काउंटर को आईडी, पासवर्ड दिए गए हैं, जिनपर बिल जमा किया जाता है। यहां भी गढ़ जैसा घपला न हो, इसके लिए सभी 10 आईडी की जांच शुरू करा दी गई है।
उपभोक्ता के पैसे जमा करने के बाद उन्हें कंप्यूटर द्वारा जारी रसीद दी जाती है, जो आईडी पर भी रिकॉर्ड हो जाती है। सीएम-311 में इसका पूरा ब्योरा आ जाता है। अधिकारी शाम के समय काउंटर बंद होने के साथ ही कंट्रोल डिपोजिट व सीएम-311 की निगरानी शुरू कर देते हैं। प्रत्येक रसीद का मिलान किया जा रहा है। फिलहाल तो कोई घपला पकड़ में नहीं आया है। बीते तीन महीने की जांच पड़ताल कराई जा रही है।