150 दिन में 7.71 फीसदी बढ़ा लाइनलॉस, 2.67 करोड़ की बिजली चोरी
हापुड़। जिले के तीनों डिवीजन में 18.15 से 24.60 फीसदी तक बिजली की चोरी हो रही है। पांच महीने के अंदर ही चोरी में 7.71 फीसदी तक का इजाफा हुआ है, गढ़ डिवीजन की हालत सबसे ज्यादा खराब हैं। बिजली चोर ऊर्जा निगम को हर महीने 2.67 करोड़ की चपत लगा रहे हैं। पांच महीने में आठ करोड़ से ज्यादा का राजस्व चोरी में चला गया है। शासन ने संज्ञान लेकर तीनों डिवीजन को लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं।
बिजली चोरी को रोकने के लिए शहर, देहात में इंसुलेटेड वायर और मीटर लगाए गए हैं। पहले हापुड़ और गढ़ सिर्फ दो डिवीजन थे, लेकिन निगरानी बढ़ाने के लिए अब पिलखुवा को नया डिवीजन बनाया गया है, जो राजस्व से लेकर लाइनलॉस को कम रख पाने में सफल भी हुआ है। लेकिन गढ़ में बिजली चोरी का आलम यह है कि खरीद का चौथाई हिस्सा चोरी में ही चला जाता है, इसके साथ ही बिलों की वसूली भी नासूर बन रही है।
शासन की समीक्षा में पांच महीने के अंदर ही हापुड़ के तीनों डिवीजन में बिजली चोरी के आंकड़े उछले हैं। पिलखुवा डिवीजन में 1.96 फीसदी, हापुड़ में 4.95 फीसदी, गढ़ डिवीजन में 7.71 फीसदी लाइनलॉस बढ़ा है, अप्रैल महीने की समीक्षा में लाइनलॉस कम था, जो अब चर्म पर पहुंच गया है।
जिले के तीनों डिवीजन में बिलिंग वाले उपभोक्ताओं की संख्या लगभग बराबर है, हर डिवीजन में करीब 98 हजार कनेक्शन धारक हैं। वसूली के मामले में पिलखुवा डिवीजन सबसे पीछे है। गौर करें तो हापुड़ डिवीजन में 2601 उपभोक्ताओं से निगम आज तक वसूली नहीं कर पाया है, पिलखुवा डिवीजन में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 8251 है और गढ़ में कभी बिल न देने वाले उपभोक्ता 4953 हैं।
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-जिले के तीनों डिवीजन में लाइनलॉस की स्थिति-
डिवीजन अप्रैल 2022 सितंबर 2022 लक्ष्य
हापुड़ 16.16 21.01 19.07
पिलखुवा 16.19 18.15 17.92
गढ़ 16.89 24.60 23.23
(नोट: लाइनलॉस के आंकड़े प्रतिशत में हैं, लक्ष्य में दी गई संख्या के अनुरूप लाइनलॉस घटाने के आदेश हैं।)
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-जिले के तीनों डिवीजन में हर महीने यूनिट चोरी की स्थिति-
डिवीजन यूनिट कीमत रुपये में
गढ़ 1722000 10332000
हापुड़ 1470700 8824200
पिलखुवा 1270500 7623000
(नोट: तीनों डिवीजन में हर महीने करीब 70-70 मिलियन यूनिट खपत होती है।)
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- विजिलेंस को दी है निगरानी, नहीं हो रहे सफल-
जिले के तीनों डिवीजन में सबसे अधिक लाइनलॉस वाले फीडर चिह्नित कर, उन्हें विजिलेंस की निगरानी में दिया गया है। लेकिन इन फीडर पर भी बिजली की चोरी कम नहीं हो रही है। पांच महीने के आंकड़े चौकाने वाले हैं, जिसने अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी है।
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-इस तरह होती है बिजली की चोरी
*विद्युत मीटर पर सर्किट लगाकर चोरी।
*इंसूलेटिड वायर में कील के जरिए बिजली चोरी।
*नंगे तारों पर कटिया डालकर चोरी।
*मीटर रीडर से मिलकर नो डिस्प्ले में बिल बनवाना व मीटर को नष्ट कर देना।
(नोट: इस तरह की चोरियां विजिलेंस द्वारा पकड़ी गई हैं।)
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-बिजली चोरी रोकने का अभियान हैं जारी-
जिले में बिजली चोरी रोकने का अभियान जारी है, अधिशासी अभियंताओं को लाइनलॉस कम करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। राजस्व की वसूली भी लगातार करायी जा रही है।--यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।