हरिद्वार की तर्ज पर ब्रजघाट क्षेत्र को धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने और प्राचीन काल की तरह गंगा की धारा गंगा मंदिर की पैड़ियों को लाने के लिए करीब 3000 करोड़ से वहां विकास कार्य कराने का प्रोजेक्ट सिंचाई विभाग ने बनाया है।
अब सिर्फ इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार से फंड की स्वीकृति होनी है। इस कार्य को नमामि गंगे परियोजना का ही हिस्सा माना जा रहा है। उत्तराखंड बनने पर हरिद्वार के बाद गंगा के तट पर बसे ब्रजघाट को प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
वहां वेस्ट यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान आदि स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर गंगास्नान करते हैं। इतना ही नहीं यहां अस्थियां विसर्जित करने भी बड़ी देश के कोने से लोग यहां आते है। हर पूर्णिमा और अमावस्या को भारी भीड़ गंगा किनारे जुटती है।
वैसे तो मेरठ के मंडलायुक्त रहते दीपक सिंघल ने गढ़ के पास गंगा से एक चैनल निकालकर गंगा मंदिर से होते हुुए ब्रजघाट तक ले जाने का प्रोजैक्ट तैयार कराया था, लेकिन इससे पहले कि उस पर अमल होता, उनका तबादला हो गया था।
केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद केंद्रीय मंत्री उमा भारती ब्रजघाट आईं तो उन्होंने कुछ वैसा ही प्रोजेक्ट बनाने की इच्छा व्यक्त की और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी इस विषय पर वार्ता की।
इसका लाभ यह हुआ है कि शासन ने इस प्रोजैक्ट को तैयार करने के निर्देश दिए, जिस पर करीब 3000 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सिंचाई विभाग गढ़ गंगा हापुड़ के अधिशासी अभियंता नंदेश्वर जैन इस संबंध में बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के चक्कर में उनका कार्यालय रुड़की से हापुड़ आ गया है। प्रोजेक्ट के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि इस प्रोजैक्ट के तहत तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच एक बैराज बनाकर वहां से दो चैनल निकालना है, जो ब्रजघाट पर आकर फिर से गंगा में मिलने कसे प्रस्तावित हैं। गढ़ की तरफ बनने वाली चैनल गढ़ गंगा मंदिर की पैडिय़ों के पास से होकर ब्रजघाट की ओर मोडना प्रस्तावित है।
इन दोनों चैनलों के किनारे पर हरिद्वार की हर की पैड़ी की तरह जगह जगह घाट बनाये जाने का प्रस्ताव है। इन चैनलों की लंबाई करीब सात सात किमी होगी। नए बैराज पर 6 लेन का हाइवे भी गुजारने का प्रस्ताव है।
उनका कहना है कि गढग़ंगा के आसपास हस्तिनापुर सेंचुरी का क्षेत्र होने के कारण वहां से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया है। हालांकि बजट मिलने के बाद ही कार्य शुरू होगा। कई अन्य विभागों से भी स्वीकृति और सहयोग लेना होगा।