हजारों मील की दूरी तय कर भारत आने वाले पक्षी अन्य जलाशयों और गंगा के खादर क्षेत्र में तो पड़ाव डाल रहे हैं, लेकिन ब्रजघाट पर गंदगी का अंबार और गंगा में गिर रहे प्रदूषित जल के कारण यहां से दूरी बनाए हुए हैं।
बता दें कि, सर्दियों में रूस के साइबेरिया प्रांत में जलाशयों में बर्फ की मोटी चादर जमा होने के चलते वहां के पक्षी भारत और अन्य देशों की ओर पलायन कर जाते हैं। सर्दियों में विभिन्न जलाशयों और नदियों में इन पक्षियों के आगमन से रंगत बढ़ जाती है।
अब जलस्रोतों में गिरावट और गंगा में गिरते प्रदूषित जल के चलते यह पक्षी इनसे दूर होने लगे हैं। सारस, बत्तख, चहा, मुर्गाबी, सुर्खाब सहित विभिन्न प्रजाति के साइबेरियन पक्षी देश में विभिन्न स्थानों पर पहुंचने के साथ ही क्षेत्र के गुलालपुर, खादर मेला स्थल, पूठ एवं तिगरी के सामने गंगा में पड़ाव डाल चुके हैं।
मगर इस बार ब्रजघाट पर गंदगी के अंबार और गंगा में गिर रहे प्रदूषित जल के चलते अभी तक रंग बिरंगे मेहमान नहीं आए हैं। पर्यावरणविद प्रो.अब्बास अली ने बताया कि गंगा में गिर रहे दूषित नालों पर अंकुश नहीं लगने, मानवीय गतिविधियां बढ़ने और जलधारा के बीच रेतीला टापू बनने की वजह से विदेशी पक्षी ब्रजघाट से दूरी बनाए हुए हैं।