हापुड़। जिले में तीन नए ब्लैक स्पॉट पर इस वर्ष सबसे अधिक सड़क हादसे हुए हैं। यहां हुए 80 सड़क हादसों में 49 लोगों की जान गई है, जबकि 69 घायल हुए हैं। तीनों स्थानों पर सड़क सुरक्षा से बचाव के उपायों का पालन नहीं हो रहा है।
पिछले दिनों हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डीएम अभिषेक पांडेय ने ब्लैक स्पॉट व नए दुर्घटना क्षेत्रों को खत्म करने को लेकर निर्देश दिए थे। बैठक में बछलौता कट, शिवा ढाबा के पास, सरस्वती मेडिकल कॉलेज के पास, रामा मेडिकल कालेज के पास, हाईवे 9 पर बाबूगढ़ से बक्सर कट और ततारपुर चौराहे पर बढ़ रही दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे।
तीनों सर्किल क्षेत्र में सबसे अधिक इन मार्गों के बीच सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, इसमें शिवा ढाबा से स्वामी बालांद आश्रम तक, छिजारसी टोल प्लाजा से अनवरपुर कट और श्री गणेश टूरिस्ट ढाबा से ब्रजघाट टोल प्लाजा का क्षेत्र शामिल है। वाहनों की तेज रफ्तार, संकेतकों की कमी के कारण दुर्घटनाएं होने की बात सामने आई है।
वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं के आधार पर चिह्नित ब्लैक स्पॉट
थाना क्षेत्र ब्लैक स्पॉट दुर्घटनाएं घायल मृतक
बाबूगढ़ शिवा ढाबा से स्वामी बालांद आश्रम तक 26 47 14
पिलखुवा छिजारसी टोल प्लाजा से अनवरपुर कट 23 17 13
गढ़मुक्तेश्वर श्री गणेश टूरिस्ट ढाबा से ब्रजघाट टोल प्लाजा तक 31 35 22
इस वर्ष में जिले में हुई कुल सड़क दुर्घटनाएं
वर्ष - 2025
दुर्घटनाएं 332
घायल 367
मृतक 185
नोट : अक्तूबर माह तक यातायात पुलिस द्वारा जारी किया गया डाटा।
जिले में अभी 21 ब्लैक स्पॉट
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में कुल 21 ब्लैक स्पाट हैं, इसमें से 15 अकेले राष्ट्रीय हाईवे 9 पर हैं। यह वर्ष 2021 से लगातार बरकरार हैं। जनपद में सरस्वती मेडिकल कालेज के पास, मारवाड़ तिराहा, पिलखुवा बस स्टेशन क्षेत्र, जेएमएस कालेज कट, ब्रजनाथपुर ब्रिज, हापुड़ नगर में मेरठ फ्लाईओवर, बदनौली चौराहा, कंदौला गेट, सिंभावली मिल गेट फ्लाईओवर के पास, सिखेड़ा फ्लाईओवर के पास, खुड़लिया बाइपास, गांव अल्लाबख्शपुर, सबली कट, निजामपुर कट फ्लाईओवर के पास, ततारपुर फ्लाईओवर व गोल चक्कर, मंसूरपुर कट, टियाला, बाबूगढ़ थाने से ग्राम सिमरौली कट, कुचेसर चौपला फ्लाईओवर, ब्रजघाट, छिजारसी टोल और जिंदल नगर फ्लाईओवर शामिल है।
कोट -
जिले में सर्किलवार तीन ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। हादसों को कम करने के लिए लगातार धरातल पर काम चल रहा है। संकेतक आदि भी जगह-जगह लगवा रहे हैं।
- रमेश कुमार चौबे, एआरटीओ प्रवर्तन