हापुड़। 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मना, इसमें हापुड़ के अंदर बाबू सरजू प्रसाद ने ही ध्वजारोहण कर, घोषणा पत्र पढ़ा था। इसके बाद विशाल जलसे का आयोजन हुआ। 9 अगस्त 1942 की सुबह भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान के दौरान जब उनकी गिरफ्तारी हुई तब उनके देशभक्ति भाषण के सुन थानेदार की आंखें नम हो गई थी।
स्वतंत्रता से जुड़े पहलुओं को अपने अंदर समेटी पुस्तक में हापुड़ के नायकों का खूब जिक्र है। इसमें हापुड़ के बाबू सरजू प्रसाद खूब चर्चाओं में रहे। जनता को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने में उन्होंने खूब मेहनत की, ब्रिटिश हुकूमत को इसका पता चला तो उनकी गिरफ्तारी कराई गई। अंंग्रेजी सरकार के खिलाफ हापुड़ तहसील के द्वार पर उन्होंने प्रभावशाली व हृदय विदारक भाषण दिया, जिसे सुन वहां खड़े थानेदार भी रो पड़े थे।
इतना ही नहीं अगस्त 1936 को तिलक दिवस के अवसर पर बाबू सरजू प्रसाद की अध्यक्षता में मेरठ टाउन हॉल में विराट सार्वजनिक सभा हुई, इस सभा के आयोजन के साथ देश में होने वाले इस चुनाव युद्ध का भी श्री गणेश हुआ। 1946 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मेरठ अधिवेशन की स्वागत समिति के महासचिव चुने गए थे। बाबू सरजू प्रसाद के पौत्र प्रफुल्ल कुमार तापड़िया ने बताया कि 26 नवंबर 1971 को उनके दादा का निधन हो गया था।