हापुड़। आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी 29 अक्तूबर 1942 में असहयोग आंदोलन के प्रति लोगों को प्रेेरित करने के लिए हापुड़ के गांव असौड़ा आए थे। यहां उन्होंने चौधरी रघुवीर नारायण सिंह त्यागी के महल में रात्रि विश्राम किया था। जब उन्होंने लोगों को संबोधित किया तो हजारों लोग मौजूद थे। उनकी यात्रा मेरठ से फफूंडा, खरखौदा और असौड़ा आदि गांवों से होते हुए गाजियाबाद पहुंची थी। इस दौरान लोनी में नमक के पैकेट बांटे गए थे।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ग्राम असौड़ा में एक जनसभा को संबोधित किया था। जनसभा में राजगोपालाचारी, मौलाना आजाद भी मौजूद थे। सभा का आयोजन चौधरी रघुवीर नारायण सिंह त्यागी ने किया था, जिसमे बड़ी संख्या में क्षेत्र के निवासी मौजूद थे। ग्राम असौड़ा प्रवास के दौरान उन्होंने लोगों से सीधा संवाद भी किया था। सुबह के समय सफाई कर्मचारी को देखा, तो उससे पूछा कि तुम झाड़ू कहां तक लगाते हो? तब उसने कहा कि मंदिर के अंदर भी मैं ही झाड़ू लगाता हूं और बाहर भी। यह सुनकर महात्मा गांधी बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें लगा कि जिस समाज का वह सपना देख रहे हैं वह पूरा होता नजर आ रहा है। उन्होंने इस बात का जिक्र अपने अखबार नवजीवन, यंग इंडिया और हरिजन में भी किया था।
दरअसल, गांव असौड़ा वर्ष 1800 से वर्ष 1947 तक असौड़ा रियासत के नाम से जाना जाता था। इस गांव के रघुवीर नारायण सिंह के पिता का नाम चौधरी देवी सिंह थे। रघुवीर नारायण सिंह के पौत्र अजय वंश नारायण सिंह बताते हैं कि हम छोटे थे। महात्मा गांधी उनके बाबा चौधरी रघुवीर नारायण सिंह को बहुत प्यार करते थे। वह जब आते थे, तो कई बार महल में रुकते थे।