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Hapur News: 5जी स्मार्टफोन, मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर आशाओं ने घेरी सीएचसी, धरना

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गढ़ रोड स्थित सीएचसी में धरने पर बैठी आशाएं। स्रोत: संस्था
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हापुड़। आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों ने लंबित मांगों के समर्थन में हापुड़ सीएचसी पर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने मानदेय में वृद्धि, स्मार्टफोन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से उनमें नाराजगी है।
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प्रदर्शन कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार कल्याण, टीबी नियंत्रण, आयुष्मान कार्ड और जननी सुरक्षा योजना सहित कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में उनका योगदान रहता है। इसके बावजूद उन्हें मानदेय और कार्य से जुड़ी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 21 हजार रुपये और आशा संगिनी का मानदेय 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए। इसके अलावा संगिनी बहनों को कार्यक्षेत्र में आने-जाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी और पांच जी स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आभा और आयुष्मान कार्ड से संबंधित कार्यों का उचित भुगतान, निर्धारित विजिट के आधार पर प्रतिदिन 700 रुपये मानदेय तथा दुर्घटना की स्थिति में परिवार को 10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठाई।
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साथ ही कैशलेस इलाज, दवाइयों, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की। इसके अलावा सीएचओ व एनएचएम के संविदा कर्मी भी हड़ताल पर रहे। प्रदर्शन करने वालों में मनोज तोमर, विमल शर्मा, अनीता, राधा, कृष्णा आदि मौजूद रहीं।

एसडीएम को सौंपा सीएमओ के नाम का ज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। मानदेय बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को आशा कार्यकर्ता संगठन ने तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। अनिता के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की ओर से घोषित मांगों और लंबित समस्याओं के समाधान की मांग उठाते हुए सीएमओ के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे गांवों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, बच्चों के टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी सरकारी योजनाओं को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें काम के अनुरूप मानदेय नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता का 21 हजार और आशा संगिनी का 26 हजार रुपये मानदेय होना चाहिए। वहीं, उन्होंने कहा कि सभी के लिए शासन स्तर से स्कूटी उपलब्ध कराई जाए। वहीं, दस लाख तक के मुआवजे की मांग की है। इस मौके पर शकीला, गीता, रीना, शोभा, आशा, गुड्डी, सुदेश, मुनेश, पूजा, सीमा, मंजू समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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