हापुड़। जिले में अमोनियम सल्फेट उर्वरक को एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश) बताकर बेचा जा रहा है। पैकेजिंग पर भी एनपीके ही लिखा है। ऐसे में किसान गुमराह होकर इस उर्वरक को खरीद रहे हैं। भाकियू के पदाधिकारियों ने इस मामले को कलक्ट्रेट में उठाया।
भाकियू के जिलाध्यक्ष पवन हूण ने बताया कि कृषि विभाग उर्वरक अनुभाग लखनऊ द्वारा 200 मीट्रिक टन एनपीके निजी क्षेत्र में आपूर्ति के लिए आवंटित किया गया है। निजी दुकानों पर यह उर्वरक किसानों को बड़ा एनपीके एवं छोटा अमोनियम सल्फेट लिखकर बेचा जा रहा है। दरअसल, पैकेजिंग पर एनपीके लिखा है, जबकि अंदर अमोनियम सल्फेट हैं।
किसान पैकेजिंग से भ्रमित होकर, इस उर्वरक को खरीद रहे हैं लेकिन फसलों में इसका अच्छा रिजल्ट नहीं आ रहा है क्योंकि एनपीके नाईट्रोजन, फास्फोरस और पीटाश का मिश्रण है। इसका प्रयोग गन्ने में किया जाता है, जबकि अमोनियम सल्फेट में सिर्फ नाइट्रोजन और सल्फर है। ऐसे में यह उर्वरक फसल की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने डीएम को पत्र सौंपकर बताया कि किसान सरकारी उत्पादों पर विश्वास करते हैं। लेकिन जिस तरह पैकेजिंग भ्रमक है, इससे किसानों का विश्वास भी डगमगा रहा है। यह उर्वरक नियंत्रण आदेश का भी उल्लंघन है।
उन्होंने बताया कि विशेष चिंता का विषय यह है कि यह आपूर्ति मुख्यत गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में की जा रही है। गन्ना फसल में संतुलित पोषण के लिए नाइट्रोजन, फाॅस्फोरस एवं पोटाश तीनों प्रमुख तत्व आवश्यक हैं। एनपीके उर्वरक का उद्देश्य यही संतुलित पोषण प्रदान करना है। जबकि अमोनियम सल्फेट में ऐसा कुछ नहीं होता।
डीएम ने किसानों की समस्या को सुनकर, आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस मौके पर कटार सिंह, मोनू त्यागी, रवि भाटी, अशोक राणा, महेंद्र त्यागी, राजवीर भाटी, ओमप्रकाश त्यागी, बबलू चौधरी, योगेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।