भीषण गर्मी में अफसरों की लापरवाही से छह माह में 664 ट्रांसफार्मर फुंकने से बिजली निगम को लगभग 10 करोड़ का चूना लगा है। इनमें अधिकांश ट्रांसफार्मर 25केवीए क्षमता के हैं। देहात अंचल में क्षमता से अधिक नलकूपों का भार ट्रांसफार्मरों पर डालने से यह समस्या सामने आई है।
दरअसल, हापुड़ डिवीजन में लगे करीब 3300 ट्रांसफार्मर से करीब 40 हजार कनेक्शनों से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति दी जाती है। इस बार ट्रांसफार्मर फुंकने की समस्या डिवीजन में विकराल रूप ले लिया है। आए दिन नगर-देहात में ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं।
कई योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद भी ओवर लोडिंग की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि देहात अंचल में जिन संयोजनों से किसानों को नलकूपों के कनेक्शन दिए गए थे।
उनकी क्षमता बढ़ाए बगैर ही निगम ने स्वत: नलकूपों की मंजूरी पांच हार्सपावर से बढ़ाकर साढ़े सात तक कर दी है। ऐसे में किसानों ने बिल के सापेक्ष अपने नलकूपों के मोटर की क्षमता बढ़ा ली।
अब ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ने से इनके फुंकने की समस्या विकराल होती जा रही है। इस बार अप्रैल से सितंबर माह के अंदर डिवीजन क्षेत्र में लगे 664 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। निगम अफसरों का कहना है कि इससे निगम को करीब 10 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
इस वर्ष बारिश के दौरान आकाशीय बिजली भी ट्रांसफार्मर पर आफत बनकर बरसी। आकाशीय बिजली से डिवीजन क्षेत्र में लगे करीब 200 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। इसके चलते वर्कशॉप में रिपेयरिंग कार्य पर भी उठे सवाल उठने लगे हैं।
मोदीनगर रोड स्थित वर्कशॉप में 63केवीए क्षमता तक के ट्रांसफार्मर की रिपेयरिंग की जाती है। लेकिन सबसे ज्यादा 25 केवीए क्षमता के ही ट्रांसफार्मर फुंके हैं।
अधिशासी अभियंता पीके गौतम का कहना है कि गर्मी में ओवर लोडिंग की समस्या के चलते इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर फुंके हैं। काफी हद तक अब ओवर लोडिंग की समस्या को दूर कर दिया गया है। इससे ट्रांसफार्मर के फुंक में जरूर कमी आएगी।