प्राचीन गंगा मंदिर के पुरोहित संतोष कौशिक ने बताया कि इस बार पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान है। इसकी पूर्व संध्या (कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की शाम) को दीपदान किया जाता है। इसलिए आज संध्याकाल में दीपदान किया जाएगा। गढ़मुक्तेश्वर मेले के साथ ब्रजघाट, पुष्पावती पूठ पर भी गंगा घाटों पर दीपदान के लिए लोगों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेलाधिकारी श्रीराम यादव ने बताया कि सोमवार शाम तक ब्रजघाट और खादर के मेले में लगभग 25 लाख श्रद्धालु पहुंच गए थे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं से लेकर सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद हैं।
सूर्यास्त के समय होता है दीपदान
धार्मिक अनुष्ठान के लिए सूर्यास्त के समय वह श्रद्धालु आएंगे, जिनके परिवार के सदस्य उनके बीच अब नहीं रहे। दीपदान उन्हीं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए संबंधित परिवार के लोग करते हैं। ऐसे में उनकी आंखें भी भर आती हैं। इस परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट ऐसे प्रतीत होते हैं, जैसे आकाश के तारे धरती पर उतर आए हों। मान्यता है कि द्वापर युग में कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरव सेना व पांडवों के कुटुंब संबंधियों के शव पड़े थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन सभी दिवंगत आत्माओं की शांति का मार्ग पांडवों को बताया था। तब पांडवों ने भगवान कृष्ण के साथ गंगा तट पर पहुंच कर दीपदान किया था। उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की पूर्व संध्या थी।
ब्रजघाट में भी जुटेगी भीड़
मेला में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। हर-हर गंगे के जयकारों से गंगा घाट गूंज रहे हैं। श्रद्धालु गंगा स्नान कर भजन कीर्तन कर रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी पूरे इंतजाम कर लिए हैं। हाईवे पर जाम न लगे इस पर विशेष ध्यान है।