सिंभावली। क्षेत्र के गांव हरोड़ा में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को व्यास मनोज मिश्रा ने भक्तों को गोवर्धन लीला की कथा का रसपान कराया। अत्याचारी कंस के वध पर कथा स्थल श्रीकृष्ण के जयघोष से बहुत देर तक गूंजता रहा।
व्यास ने कहा कि जिसके हृदय में अहंकार का वास हो जाता है, वहां पर भक्ति का ठहराव संभव नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने कई भक्तों का अंहकार दूर करने के लिए द्वापर युग में अनेक लीलाएं रचीं। जिनमें गोवर्धन लील भी काफी महत्वपूर्ण है।
जिसे उन्होंने देवराज इंद्र के अहंकार को नष्ट करने के लिए रचा। व्यास ने कहा कि ब्रजवासी इंद्र पूजन की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान कृष्ण ने बाबा नंद से इस पूजा के बारे में पूछा।
उन्होंने बताया कि अच्छी बरसात हो, इसलिए देवराज इंद्र को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा की तैयारी की जा रही है। तब कान्हा ने उन्हें कहा कि यदि पूजन करना है, तो गोवर्धन पर्वत का किया जाना चाहिए क्योंकि गोवर्धन पर्वत ही ब्रजमंडल की रक्षा करने के साथ-साथ हरियाली, गायों के लिए चारा, फसल और अन्य संसाधन उपलब्ध कराते हैं।
इसकी जानकारी मिलने पर इंद्र कुपित हो गए। उन्होंने नंदग्राम और क्षेत्र में घनघोर बारिश शुरू कर दी। अपने भक्तों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर धारण किया।
इस दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक माहौल से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। इस मौके पर परविंद्र सनातनी, गीता, शशि, गौरव, देवेंद्र शर्मा, अंकुर मास्टर, राकेश आदि मौजूद रहे।