हापुड़। लोकसभा चुनाव में चली मोदी की आंधी में तमाम जातीय समीकरण ऐसे बिगड़े की अधिकांश मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशियों की ओर रूख कर दिया। इसी का परिणाम था कि हापुड़ जिले में तीनों भाजपा प्रत्याशियों ने भारी मतों से जीत दर्ज की जबकि अन्य प्रमुख दलों के प्रत्याशी धूल चाट गए।
दरअसल बसपा को उम्मीद थी कि मेरठ और अमरोहा सीट पर दलित मुस्लिम गठजोड़ उनके प्रत्याशियों की जीत हासिल करायेगा जबकि गाजियाबाद सीट पर दलित मुस्लिम और ब्राहमण गठजोड़ उसके प्रत्याशियों को जीत दिला देगा। लेकिन मोदी की आंधी के चलते वैश्य, त्यागी, ब्राह्मण, गुर्जर, जाट, पंजाबी, ठाकुर, तथा अन्य पिछड़ी जातियों के साथ साथ इस बार दलितों ने भी जमकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया जिससे तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया।
कांग्रेस रालोद ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जाटों को केन्द्र आरक्षण में आरक्षण देकर जाट कार्ड खेला था लेकिन मतदाताओं ने इस नकार दिया और वोट की राजनीति मानते हुए भाजपा के पक्ष में मतदान किया जिससे कांग्रेस के प्रत्याशियों को भारी पटकनी खानी पड़ी। अमरोहा सीट पर तो भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत को कांग्रेस रालोद का प्रत्याशी सिर्फ इसलिए प्रत्याशी बनाया था कि जाटों का एक लाख से अधिक वोट एक तरफा मिल जायेगा लेकिन वहां भी उनका दाव फेल हो गया और वहां से भाजपा के कं वर सिंह तंवर भारी मतों से चुनाव जीत गए।
सपा की नीतियां तो सीधे सीधे मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का कार्ड खेलने वाली रहीं है। लेकिन सपा के नेता यह भूल गये कि अकेले मुस्लिम और कुछ पिछड़ी जातियों के मतों से कोई सांसद नहीं बन सकता। फिर भी सपा ने मेरठ सीट से कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर को मैदान में उतारा था जबकि बसपा ने शाहिद अखलाक पर कार्ड खेला था।
दो मुस्लिम प्रत्याशी होने तथा अन्य तमाम जातियों का रूझान भाजपा की ओर होने से दोनों पार्टियों के प्रत्याशी हार गए। सपा के लैपटॉप, साइकिल बेरोजगारी भत्ता बांटना, सिर्फ मुस्लिम क्षेत्रों में 25 प्रतिशत विकास का पैसा लगवाना भी काम नहीं आया। बल्कि अधिकांश मुस्लिम ने बसपा को वोट दिया। ऐसा ही गाजियाबाद लोकसभा सीट पर हुआ। वहां भी बसपा के दलित ब्राहमण और मुस्लिम गठजोड़ की हवा निकल गई। भाजपा के जिलाध्यक्ष संजय त्यागी का दावा है कि मोदी की लहर ने हापुड़ जिले में भाजपा को एक तरफा जीत दिलाई है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र प्रधान का कहना है कि कांग्रेस से लोगों की नाराजगी के कारण भाजपा को जीत मिली है। जबकि बसपा के पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह का कहना है कि मुस्लिम मतों के बंटने के कारण बसपा प्रत्याशी का हार हुई है।