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चेंपा रोग ने पांव पसारे

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सरसों समेत हरी सब्जी की खेती पर चेंपा रोग का अटैक
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गढ़मुक्तेश्वर। चेंपा रोग के पांव पसारने से सरसों समेत हरी सब्जी की खेती में नुकसान होने से किसानों में बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि इस रोग से सरसों में तीस फीसदी तक नुकसान हो जाता है।
रात में कोहरा छाने और पाला गिरने पर सूरज की चमक धीमी पड़ने से मध्य दिसंबर से लेकर जनवरी माह चालू होने के दौरान मौसम चक्र काफी हद तक प्रभावित हुआ है। मौसम का मिजाज बिगड़ने से सरसों समेत फूलगोभी जैसी हरी सब्जी में चेंपा रोग तेजी से पांव पसार रहा है, जिससे फसलों में नुकसान होने से किसानों में बेचैनी बढ़ गई है।
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परंपरागत उपाय कारगर न होने से यह रोग सरसों समेत फूलगोभी जैसी हरी सब्जी की खेती को तेजी के साथ अपनी गिरफ्त में जकड़ रहा है। इस रोग से सर्वाधिक नुकसान सरसों की पछेती फसल पर हो रहा है, जिससे गन्ने की कटाई के बाद बुआई करने वाले किसान सर्वाधिक चिंतित हैं।
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क्या है चेंपा कीट:
कृषि विभाग के सहायक प्राविधिक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि चेंपा फसलों का रस चूसने वाली श्रेणी का एक कीट है, जिसका साइज बेहद महीन होता है। यह कीट बिना पंखों वाला होता है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान बढ़ोतरी होने पर हल्के पंख उग आने से यह सरसों की फसल से उड़कर दूसरे पेड़-पौधों को भी अपनी गिरफ्त में ले लेता है।
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-क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ:
कृषि विज्ञान केंद्र मुरादनगर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ.अरविंद यादव कहते हैं कि सर्दी के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और सूरज की चमक धीमी पड़ने से चेंपा रोग तेजी से पांव पसारता है, जिससे अकेले सरसों की फसल में तीस प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। जिससे बचाव के लिए किसानों को जागरूक होकर वैज्ञानिक विधि का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।
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-बचाव के लिए क्या करें:
.अगेती प्रजाति बोने से चेंपा रोग से बचा जाना संभव है, क्योंकि चेंपा का पीक टाइम मध्य दिसंबर से मध्य फरवरी तक रहता है।
.पौधों के बीच उचित दूरी रखें, घने पौधों में धूप का प्रभाव न पहुंचने से यह रोग अधिक प्रभाव डालता है।
.रासायनिक खाद का अंधाधुंध प्रयोग न करें, इससे पौधे की लंबाई बढ़ जाती है जिसमें रोग तेजी से फैलता है।
.मित्र कीट का ध्यान रखें, कीटनाशक का छिड़काव उसी दशा में करें जब खेत में लाल रंग और परों पर काले धब्बे वाला कीट न हो। क्योंकि यह कीट बड़ी तेजी के साथ चेंपे को नष्ट कर देता है।
.कीटनाशक छिड़काव सावधानी से हो, दोपहर ढाई बजे के बाद ही कीटनाशक का स्प्रे करें। क्योंकि इससे पहले मधुमक्खी फूलों से शहद एकत्र करने आती हैं, जिनके जीवन को स्प्रे से गंभीर खतरा रहता है।
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चेंपा से मुक्ति के उपाय:
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक और कृषि प्राविधिक सहायक सतीश चंद्र शर्मा कहते हैं कि 0.5 प्रतिशत इमिडाक्लोरफिड पानी में मिलाकर स्प्रे करने से चेंपा रोग नष्ट हो जाता है। इसके अलावा नीम के तेल की 0.5 प्रतिशत मात्रा 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना भी लाभप्रद रहता है। उन्होंने बताया कि उक्त दोनों छिड़काव के दौरान टंकी में एक चम्मच शैंपू अथवा डिटर्जेंट पाउडर मिलाना भी लाभकारी रहता है।
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