प्रोजेक्टर पर क ख ग, एलईडी पर देख रहे कार्टून
हापुड़। कुछ दिन पहले तक फर्श पर बैठकर बिना किताबों के पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्कूल में बदलाव वास्तव में चौंकाने वाले हैं। ब्लैक बोर्ड नहीं अब यही नौनिहाल प्रोजेक्टर पर क ख ग सीख रहे हैं। बोर होने पर एलईडी पर कार्टून देख रहे हैं। आलम यह है कि इन स्कूलों के सामने जिले के नामी पब्लिक स्कूलों की रंगत भी फीकी पड़ने लगी है।
जिले के 40 परिषदीय स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने के लिए जिला पंचायत राज विभाग को सौंपे गए थे। विभाग ने 40 में से 25 स्कूलों को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में बच्चों को प्रोजेक्टर से पढ़ाया जा रहा है। मनोरंजन के लिए एलईडी पर कार्टून देखने को मिल रहा है। वीडियो के माध्यम से ज्ञान वर्धक बातें बच्चों को बतायी जा रही हैं। बच्चों को स्कूल में स्मार्ट क्लास, डायनिंग रूम, किचिन, आकर्षक बैंच, झूले, आरओ फ्रिज, के साथ जगह जगह डस्ट बिन लगाए गए हैं। स्कूलों की छवि पब्लिक स्कूलों से भी बेहतर है।
माहौल बदला तो बदल गया शिक्षा का स्तर--
इन परिषदीय स्कूलों की रंगत सुधरी है तो यहां शिक्षा के स्तर में भी सुधार हो गया है। स्कूलों में सुविधाओं को देखते हुए बच्चों की उपस्थिति में 15 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है। अभिभावक भी इस बदलाव से खुश हैं। इन स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए अभिभावकों का रुख बदला है।
एक स्कूल में आ रहा तीन से चार लाख का खर्च-
डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि परिषदीय स्कूलों को मॉडल स्कूलों का रूप देने में अधिकतम तीन से चार लाख रुपये का बजट लगा है। इन स्कूलों में बच्चों को सभी सुविधाएं प्राप्त होंगी।